कोटा में 25 हजार घर बाढ़ की चपेट में, दर्जनों बस्तियां डूबी, 23 लोगों की तबीयत खराब, NDRF ने रेस्क्यू कर निकाला

Zuber Khan

Updated: 17 Sep 2019, 12:57:03 PM (IST)

Kota, Kota, Rajasthan, India

कोटा. मध्यप्रदेश में भारी बारिश से चम्बल नदी के चारों बड़े बांधों में पानी की जबरदस्त आवक हो रही है। बांधों के गेट खोले जाने से डाउन स्ट्रीम की एक दर्जन से अधिक बस्तियां जलमग्न हो गई है। बस्तियों में 10 से 15 फीट पानी भरा हुआ है। 25 हजार से अधिक मकान बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए सेना व एनडीआरएफ की टीमें तैनात की हुई है। कोटा बैराज क्षेत्र को हाई रिस्क जोन घोषित कर दिया गया है। बैराज की निकासी की कुल क्षमता से करीब सवा लाख क्यूसेक पानी अधिक छोड़ा जा रहा है।

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बार-बार मुनादी के बाद भी लोग घर छोडऩे को तैयार नहीं हुए थे तो पुलिस ने आपदा प्रबंधन की टीमों के साथ जाकर सख्ती से लोगों को निकाला। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है। हालांकि अभी प्रशासन ने नुकसान का सर्वे शुरू नहीं किया है। वहीं, बूंदी जिले के रोटेदा कस्बे में तीसरे दिन मंगलवार को भी एनडीआरएफ मोर्चा संभाले हुए है। डोलर गांव में करीब 23 ग्रामीण बीमार हो गए। जिन्हें रेस्क्यू कर निकाला जा रहा है। 108 की मदद से मरीजों को कापरेन अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।

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इन बस्तियों में बुरे हाल
कोटा बैराज से छोड़े गए पानी से भट्टजी घाट के नीचे क्षेत्र में, नयापुरा हरिजन बस्ती, रोडवेज बस स्टैण्ड, बापू बस्ती, बालिता रोड, खण्ड गांवड़ी, सिविल लाइंस, हनुमानगढ़ी, नयापुरा खाई रोड, करबला, नंदा की बाड़ी, रंगपुरा रोड, रोटेदा आदि क्षेत्रों में 10 से 15 फीट पानी भरा हुआ है। रोडवेज के पुराने बस स्टैण्ड में सात से दस फीट पानी भरा हुआ था। बस स्टैण्ड चौकी डूब चुकी है।

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बस्तियों में पांचवे दिन भी भरा रहा पानी
चम्बल नदी के निचले क्षेत्र की दर्जनों बस्तियां मंगलवार सुबह पांचवे दिन भी बाढ़ के पानी से लबालब रही। घरों में सात से पन्द्रह फीट पानी भरा हुआ था। चार दिन से बेघर लोग बाढ़ का पानी उतरने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। कई लोग जान जोखिम में डालकर अपने घर को संभालने गए। हालांकि लोगों को रोकने के लिए जगह-जगह पुलिस और सेना तैनात कर रखी है, लेकिन लोग मानने को तैयार नहीं हैं।

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कोटा बैराज से अत्यधिक पानी छोड़े जाने के बाद शुक्रवार से बाढ़ का जलजला शुरू हुआ था, जिसने सोमवार तक करीब 25 हजार मकानों को अपनी जद में ले लिया। सैकड़ों लोगों ने पिछले चार दिन से आश्रय स्थलों, रिश्तेदारों व होटलों में शरण ले रखी है। भले ही लोग आश्रय स्थलों पर रह रहे हों, लेकिन घरों की चिंता सता रही है। दिनभर टकटकी लगाकर घर को देखते रहते हैं। कई लोग अपने मकानों की दूसरी और तीसरी मंजिल पर छत पर तिरपाल लगाकर रह रहे हैं। हालांकि प्रशासन सोमवार भी लोगों को मकान खाली करने की मुनादी करता रहा, लेकिन कई लोगों ने मकान खाली नहीं किया। बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है, पानी उतरने के बाद ही घर संभालने पर पता चलेगा कि क्या-क्या सामान सुरक्षित बचा है। बाढ़ के पानी में दर्जनों कारें, मोटरसाइकिलें भी डूबी नजर आ रही हैं।

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