
छत्रपुरा तालाब
कोटा. शहर में वन विभाग की भूमि अतिक्रमणों की भेंट चढ़ती जा रही है। करोड़ों की जमीन पर अतिक्रमी काबिज हो जाते हैं। एक-दो-तीन और देखते ही देखते हजारों नहीं तो सौ घरों की बस्ती तो बस ही जाती है। विभाग की खाली पड़ी जमीन पर लोगों ने अतिक्रमण कर पक्के मकान तक बना लिए। हालात ये हो गए कि शहर के आसपास खाली पड़ी वन भूमि पर अतिक्रमी आबाद हो रहे हैं। रावतभाटा व झालावाड़ रोड समेत आसपास की कई बस्तियां अतिक्रमियों की भेंट चढ़ गई है।
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सूत्रों के अनुसार जिले भी में वन विभाग के पास 83 हजार 366 हैक्टेयर जमीन हैं। जिले भर में स्थित विभाग की इस जमीन में से अकेले शहर के आसपास 250 (1562.5 बीघा) हैक्टेयर जमीन पर अतिक्रमियों का राज है। रावतभाटा रोड, झालावाड़ रोड समेत शहर के आसपास के इलाकों में अतिक्रमियों ने कहीं मकान खड़ कर लिए हैं तो कहीं मकान बनाने की तैयारियां हैं। कई इलाकों में वन विभाग की फोरी कार्रवाई के चलते अतिक्रमी फिर से आ धमकते हैं। आमली रोझड़ी, क्रेशर बस्ती नयागांव समेत कई इलाकों में अतिक्रमी काबिज है और इनमें लोग रह रहे हैं।
जानकारों के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में एक बीघा जमीन की कीमत अनुमानित तौर पर एक करोड़ के आसपास है। इस हिसाब से कम से कम 1500 करोड़ की भूमि पर अतिक्रमियों की मौज हो रही है। इनके अलावा करोड़ों की जमीन को अवैध खननकर्ता खोद रहे हैं।
& समय समय पर अतिक्रमियों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं। पिछले एक माह से हम लगातार कार्रवाई कर हैं। वन विभाग की जमीन पर नए अतिक्रमण नहीं होने दिए जा रहे। अतिक्रमियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अनिल कपूर, मुख्य वन संरक्षक कोटा
Published on:
13 Oct 2018 10:30 am
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