कोटा के ये विधायक 5 साल चर्चा में रहे फुल, पैसा खर्च के वक्त हो गए गुल, सुर्खियां खूब बटोरी, विकास से कन्नी काटी

कोटा के ये विधायक 5 साल चर्चा में रहे फुल, पैसा खर्च के वक्त हो गए गुल, सुर्खियां खूब बटोरी, विकास से कन्नी काटी

Zuber Khan | Publish: Jun, 18 2019 02:21:59 PM (IST) Kota, Kota, Rajasthan, India

बीते पांच साल में सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरने वाले विधायक अपने क्षेत्र का विकास कराने में सबसे फिसड्डी साबित हुए। आलम यह रहा कि जनता की मुश्किलें दूर करने के लिए वह अपनी पूरी विकास निधि तक खर्च नहीं कर सके।

कोटा. बीते पांच साल में सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरने वाले विधायक अपने क्षेत्र का विकास कराने में सबसे फिसड्डी साबित हुए। आलम यह रहा कि जनता की मुश्किलें दूर करने के लिए वह अपनी पूरी विकास निधि तक खर्च नहीं कर सके। सबसे ज्यादा खराब हालात कोटा उत्तर विधानसभा के रहे। इस क्षेत्र की जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक अपने खाते में 93.56 लाख रुपए छोड़ गए, जबकि सबसे बेहतर ट्रेक रिकॉर्ड कोटा दक्षिण का रहा, जहां पाई-पाई खर्च की गई। राजस्थान विधानसभा के विधायकों को पांच साल के कार्यकाल में अपने क्षेत्र का विकास करने के लिए कुल 10.75 करोड़ रुपए की निधि मिलती है। इसे वह क्षेत्रीय जनता की समस्याओं की गंभीरता के मुताबिक खर्च करते हैं।

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कोटा दक्षिण ने की थी पाई पाई खर्च
क्षेत्रीय विकास निधि के आंकड़ों के मुताबिक 14वीं विधानसभा के दौरान जिले के सभी छह विधायकों में से कोटा उत्तर के विधायक प्रहलाद गुंजल सबसे सुस्त रहे। सबसे ज्यादा चर्चा में रहने के साथ ही पूरे जिले में सबसे ज्यादा 93.56 लाख रुपए की विकास निधि उन्हीं के खाते में बची रह गई, जबकि उन्हें 13वीं विधानसभा में बाकी बची विधायक निधि से 44.70 लाख रुपए खर्च करने का मौका भी मिला था। वहीं दूसरी ओर कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा अपनी विकास निधि खर्च करने में सबसे अव्वल रहे। उन्होंने 14वीं विधानसभा के कार्यकाल में 10.77 करोड़ रुपए के विकास कार्य कराए। इसमें से 2.44 लाख रुपए उन्हें 13वीं विधानसभा में बची विकास निधि से मिले थे। संदीप शर्मा जिले के ऐसे इकलौते विधायक हैं, जिन्होंने पूरी विकास निधि खर्च की है।

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कई कार्य हुए निरस्त
पिछले पांच सालों में छह विधायकों ने जिन कार्यों की अनुशंसा की, उनमें से कई कार्य निरस्त हो गए। गैर अनुगत और पर्याप्त राशि की अनुशंसा होने कारण उन्हें निरस्त करना पड़ा। कई कार्य ऐसे भी रहे, जिनकी अनुशंसा के बाद एक साल तक शुरू नहीं हो पाए, इस कारण उनमें से कई काम अभी भी अधूरे हैं।

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सबसे ज्यादा काम फिर भी बच गई रकम
14वीं विधानसभा में रामगंजमंडी की तत्कालीन विधायक चंद्रकांता मेघवाल के खाते में कोटा उत्तर के बाद सबसे ज्यादा 46.73 लाख रुपए की विकास निधि बची। वहीं सांगोद के पूर्व विधायक हीरालाल नागर की करीब 1.24 लाख और पीपल्दा के पूर्व विधायक विद्याशंकर नंदवाना की करीब 63 हजार रुपए की विकास निधि वित्तीय स्वीकृति के इंतजार में बाकी बच गई। इस दौरान पूरे जिले में संख्या के आधार पर सबसे ज्यादा 503 काम लाडपुरा में हुए, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इसके बावजूद पूर्व विधायक भवानीसिंह राजावत अपनी पूरी विकास निधि खर्च नहीं कर सके। 14वीं विधानसभा के दौरान उनके खाते में 16.6 लाख रुपए की निधि वित्तीय स्वीकृति के इंतजार में बाकी बच गई।

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इंतजार की हद
15वीं विधानसभा गठित होने के साढ़े पांच महीने बाद भी अभी तक नव निर्वाचित विधायकों को क्षेत्रीय विकास निधि नहीं मिल सकी है। राशि जारी नहीं होने के कारण विधायक अभी तक अपने कोटे से कोई विकास कार्य नहीं करा सके हैं। ऐसे में पहले नगर निगम और फिर जिला परिषद के चुनावों में भी आचार संहिता के चलते करीब चार महीने तक कोई विकास कार्य नहीं हो सकेगा। इसके चलते क्षेत्रीय जनता को तकरीबन पूरा साल विधायक कोटे से विकास कार्यों की उम्मीद में ही गुजारना पड़ सकता है।

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