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ब्लैक कमाण्डो और पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच कोटा पहुंचा राजस्थान का कुख्यात डॉन, रामगंजमंडी में रुका 45 मिनट

गैंगस्टर भानू प्रताप सिंह की हत्या के मामले में भरतपुर की जेल में बंद गैंगस्टर शिवराज सिंह को सशस्त्र पुलिस बल की मौजूदगी में कोटा होते हुए रामगंजमंडी लाया गया।
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कोटा

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Zuber Khan

•

Apr 10, 2019

Gangster Shivraj Singh

ब्लैक कमाण्डो और पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच कोटा पहुंचा राजस्थान का कुख्यात डॉन, रामगंजमंडी में रुका 45 मिनट

रामगंजमंडी (कोटा). गैंगस्टर भानू प्रताप सिंह की हत्या के मामले में भरतपुर की जेल में बंद गैंगस्टर शिवराज सिंह को सशस्त्र पुलिस बल की मौजूदगी में कोटा होते हुए रामगंजमंडी लाया गया। यहां अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय में मोड़क गांव में एक ट्रांसपोर्टर पर फायर के प्रकरण में उसके बयान दर्ज हुए। आरोपी गैंगस्टर शिवराज सिंह के मंगलवार को प्रकरण में अन्य गवाहों के बयान पूर्व में दर्ज हो चुके हैं।

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गैंगस्टर शिवराज सिंह को भारी सशस्त्र पुलिस लवाजमे की मौजूदगी में सुबह करीब 10 बजकर 10 मिनट पर भरतपुर जेल से यहां लाया गया था। बस से लाए गए शिवराज सिंह को अदालत में उतारने से पूर्व साथ में आए सुरक्षा जवान अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कार्यालय के चारों हिस्सों में फैल गए। अदालत परिसर में स्थानीय पुलिस के जवान भी मुस्तैद रहे। न्यायालय में भारी सुरक्षाबल की मौजूदगी में शिवराज को लाया गया। वह न्यायालय में करीब 45 मिनट रहा। बयान दर्ज होने के बाद उसकी रवानगी हुई।

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यह था मामला
नवम्बर 2013 में गैंगस्टर शिवराज के इशारे पर ट्रांसपोर्टर पवन जैन पर फायर करने का मामला मोड़क थाने में दर्ज हुआ था। फायर में पवन तो बच गया लेकिन उसका कर्मचारी को गोली लगने से वह घायल हो गया था।

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पिछले साल भी कोटा पहुंचा था डॉन
पिछले साल फरवरी माह में गैंगस्टर शिवराज सिंह को पुलिस कड़ी सुरक्षा के बीच अंतरिम जमानत पर 5 घंटे के लिए कोटा लाई थी। यहां वह अपने ताऊ के निधन होने पर उनकी पगड़ी दस्तूर में शामिल हुआ। इस दौरान उससे मिलने वालों का तांता लगा रहा। मांडलगढ़ कोर्ट के अंतरिम जमानत के आदेश से शिवराज सिंह को कड़ी सुरक्षा के बीच कोटा में आकाशवाणी कॉलोनी स्थित उनके ताऊ के मकान पर लाया गया था। वह यहां दोपहर 12 से शाम 5 बजे तक रहा था। इस दौरान उसके हथकड़ी लगी हुई थी। जितने समय वह मकान में रहा पुलिस कर्मियों ने पूरे इलाके को घेर रखा था।

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गौरतलब है कि 12 मई 2009 को चित्तौडगढ़़ में मेनाल इलाके में भानू प्रताप गैंग ने बृजराज सिंह की हत्या कर दी थी। अपने भाई की हत्या का बदला लेने के लिए कुख्यात गैंगस्टर शिवराज सिंह ने भाई सूरज सिंह के साथ मिलकर पुलिस कस्टडी में भानू की हत्या की साजिश रची थी। अप्रेल 2011 में भानुप्रताप को उदयपुर सेंट्रल जेल से पुलिस झालावाड़ में पेशी पर लेकर जा रही थी। रास्ते में बिजौलिया इलाके में मेनाल के पास दो गाडिय़ों में सवार होकर आए गैंगस्टर शिवराज सिंह, सूरज भदौरिया 16 अन्य साथियों ने भानू प्रताप सिंह को लेकर जा रही पुलिस वैन को पीछे से टक्कर मारी। इसके बाद अंधाधुंध फायरिंग कर भानू, कमांडो प्रकाश सोहनलाल की हत्या कर दी थी।