
आशीष जोशी
देश में कोचिंग सिटी के नाम से मशहूर कोटा का यह नया अवतार है। पूरी तरह स्टूडेंट फ्रेंडली मॉडल के साथ कोटा में इन दिनों बच्चों की सहूलियतों पर फोकस किया जा रहा है। करीब 6000 करोड़ की इस इंडस्ट्री से जुड़े लोग स्टूडेंट्स को रियायतें और सहूलियतें देकर ‘केयरिंग कोटा’ की नई टेगलाइन को प्रचारित कर रहे हैं। मेडिकल और इंजीनियरिंग के अतुलनीय परिणाम देकर देश की ‘कोचिंग केपिटल’ बन चुके कोटा का यह तमगा बरकरार रहे, इसलिए अब छात्र-छात्राओं की बेहतर केयरिंग पर खास ध्यान दिया जा रहा है। जिला प्रशासन ने ‘कामयाब कोटा’ के बाद इस नए मॉडल को ‘कोटा केयर्स’ नाम देकर इससे जुड़े स्टेकहॉल्डर्स को इस मुहिम से जोड़ना शुरू किया है।
हॉस्टल-पीजी स्टाफ के बाद ऑटो चालकों को गेटकीपर एवं बिहेवियर ट्रेनिंग दी जा रही है। छात्राओं के बीच महिला ऑटो चालकों की सेवाएं लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यहां 20 से ज्यादा महिला ऑटो चालक हैं। ऑटो एंबुलेंस के माध्यम से विशेष सेवाएं और रेलवे स्टेशन व बस स्टैंड पर कोटा केयर्स हेल्प डेस्क लगाई जा रही है।
हॉस्टल में मैनुअल नाइट अटेंडेंस अनिवार्य की गई है। जो बच्चों के कमरों में जाकर की जाएगी। मेडिकल इमरजेंसी पर फेसेलिटी देने के साथ हॉस्टल में स्टूडेंट्स के लिए रिक्रिएशनल एरिया डवलप किया जाएगा।
कॉस्ट ऑफ लिविंग सस्ती करने पर फोकस: कोटा में कोचिंग स्टूडेंट्स के लिए कॉस्ट ऑफ लिविंग सस्ती करने पर जोर दिया जा रहा है। ताकि कम खर्चे में देशभर के स्टूडेंट्स का मेडिकल व इंजीनियरिंग में दाखिले का सपना साकार हो सके। जिला प्रशासन ने इसके लिए कोचिंग, हॉस्टल, मैस और ऑटो के लिए गाइड लाइन जारी की है।
कोटा आने वाला हर व्यक्ति सबसे पहले ऑटो चालक के पास पहुंचता है। यदि ऑटो चालक का व्यवहार अच्छा होता है, वो उचित किराया लेता है, अच्छी सेवा देता है तो शहर के प्रति सोच सकारात्मक हो जाती है। कोटा आने वाले स्टूडेंट्स व पेरेन्ट्स को अच्छा माहौल मिलेगा तो इससे यहां एजुकेशन टूरिज्म को भी पंख लगेंगे।
स्टूडेंट्स को कोटा में कैसे बेहतर सुविधाएं व अच्छा माहौल मिल सके, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। कोचिंग और हॉस्टल-पीजी के अलावा मैस, ऑटो, हॉस्पिटल, केमिस्ट, बुक सेलर, लाउंड्री समेत हरेक उस वर्ग को इस मुहिम से जोड़ा जा रहा है जिससे बच्चा जुड़ा है। डिनर विद कलक्टर और अन्य कार्यक्रमों में बच्चों से संवाद के दौरान कई छोटी-मोटी समस्याएं सामने आई। इन्हें एक-एक करके दूर किया जा रहा है। विश्वास है कि कोटा में स्टूडेंट्स को श्रेष्ठ कोचिंग के साथ श्रेष्ठ आवास व्यवस्था व वातावरण मिलेगा।
हॉस्टल संचालक स्टूडेंट्स से नहीं लेंगे सिक्योरिटी व कॉशन मनी और दो माह का एडवांस।
वन टाइम पास के आधार पर शहर के रिवर फ्रंट और ऑक्सीजोन में होगी स्टूडेंट्स की विजिट। कोचिंग संस्थान प्रति विद्यार्थी निर्धारित शुल्क केडीए में जमा करवाएंगे।
ऑटो रिक्शा यूनियन ने बच्चों के लिए तय की 20 रुपए प्रति किलोमीटर की अधिकतम किराया दर। परीक्षा के दिन और लगेज का अतिरिक्त किराया नहीं देना होगा। वेटिंग चार्जेज 50 रुपए प्रति घंटा।
पहली बार 10 हजार से अधिक ऑटो पर चस्पा की जा रही किराया दरें व नियम। न्यूनतम एक किलोमीटर की यात्रा का किराया 30 रुपए।
आइएमए से जुड़े अस्पतालों में ओपीडी और आईपीडी सेवाओं में स्टूडेंट्स को मिलेगी छूट।
1.25 लाख से अधिक कोचिंग स्टूडेंट्स हैं कोटा में
6000 करोड़ रुपए का सालाना टर्नओवर
1,00,000 लोगों को रोजगार
600 ओपन मैस
4,000 हॉस्टल्स
2.50 लाख स्टूडेंट्स के रहने की क्षमता हॉस्टल-पीजी में
जिला प्रशासन की हेल्पलाइन और अन्य प्लेटफार्म्स पर सर्वाधिक शिकायतें हॉस्टल्स की सिक्योरिटी और कॉशन मनी को लेकर आती थी। स्टूडेंट्स का सेशन पूरा होने पर कुछ हॉस्टल संचालक यह पैसा नहीं लौटाते थे। साथ ही मार्च से मई के बीच बैचेज के ओवरलेप होने की स्थिति में भी स्टूडेंट्स से दुर्व्यवहार की शिकायतें आती थीं।
Updated on:
25 Mar 2025 12:51 pm
Published on:
25 Mar 2025 08:04 am
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