27 दिन बाद कोटा में फिर से बाढ़, 19 गांव बने टापू, दर्जनों बस्तियां डूबी, 375 लोगों को रेस्क्यू कर निकाला, पुलिया पर 25 फीट पानी

Zuber Khan

Updated: 16 Sep 2019, 08:00:00 AM (IST)

Kota, Kota, Rajasthan, India

कोटा. मध्यप्रदेश व कोटा संभाग में लगातार हो रही भारी बारिश से कोटा जिले में 27 दिन में फिर से दूसरी बार बाढ़ आ गई। इस बार ग्रामीण अंचल व चंबल पार क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। गत माह 15 अगस्त की रात कैथून में बाढ़ आई थी। इसके बाद 12 सितम्बर की रात को कुन्हाड़ी क्षेत्र की बापू बस्ती व नयापुरा हरिजन बस्ती में बाढ़ के हालात बन गए। चंबल के सबसे बड़े चारों बांध, गांधी सागर, जवाहर सागर, राणा प्रताप, कोटा बैराज के एक के बाद एक सभी गेट खुलते गए और चंबल बाहें फैलाकर अपने पूरे वेग से बह निकली। इससे शहर की कई बस्तियां जलमग्न हो गई। फिर आई 13 सितम्बर की वो भयानक रात, लोगों की आंखों में नींद की जगह खौफ था। क्योंकि, बाढ़ आ चूकी थी।

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इटावा क्षेत्र में चंबल, कालीसिंध, पार्वती सहित सभी प्रमुख नदियां उफान पर हैं। प्रमुख नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। नदियों में उफान से एक दर्जन से अधिक गांव टापू बन गए हैं। 31 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। सूखनी नदी की पुलिया पर रविवार को करीब 20 फीट की चादर चलने से कई बस्तियों में पानी घुस गया। कीरपुरा, रघुनाथपुरा, खरवण, मोहम्मदपुरा सहित कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इन गांवों के लोगों को टीमों द्वारा रेस्क्यू कर निकाल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा रहा है। इनके खाने और ठहरने की व्यवस्था प्रशासन की ओर से की जा रही है। पार्वती पुल पर करीब 25 फीट, बड़ौद ढीपरी कालीसिंध नदी पर करीब 35 फ ीट की चादर चल रही है।

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सूखनी का 23 साल बाद रौद्र रूप
लोगों का कहना है की सूखनी नदी ने इतना रौद्र रूप सन 1996 में दिखाया था। इसके बाद इस साल शनिवार को इतना पानी आया है। जानकारी के अनुसार चंबल नदी पर बने बांधों में पानी की भारी आवक के चलते बांधों के गेट खोलने से क्षेत्र की सभी नदियों में उफ ान आया। इससे इटावा क्षेत्र के सभी सड़क मार्ग अवरुद्ध हो चुके हैं। सूखनी की पुलिया पर करीब 20 फीट की चादर चल रही है। इससे इटावा-कोटा मार्ग पर आवागमन बंद हो गया है। इससे आधा दर्जन से अधिक गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है।


ये मार्ग बंद
बडौद कालीसिन्ध पुलिया पर पानी से कोटा- श्योपुर, इटावा, मंडावरा पुलिया पर पानी होने से मंडावरा-कापरेन व बंद। लाखेरी के पास पापड़ी पर मेज नदी में उफ ान इटावा लाखेरी मार्ग बंद है। इटावा माधोपुर मार्ग भी बंद पड़ा हुआ है।

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एनडीआरएफ टीम जुटी
उपखंड अधिकारी परसराम मीना, तहसीलदार रामचरण मीणा, विकास अधिकारी डॉ गोपाल लाल मीणा, पुलिस उपाधीक्षक सुरेंद्र शर्मा, थाना प्रभारी आनंद यादव ने क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक बाढग़्रस्त गांवों का दौरा किया। उपखंड अधिकारी ने बताया कि बाढ़ से क्षेत्र में 31 गांव प्रभावित हैं तथा एक दर्जन से अधिक गांव टापू बन गए हैं। इन गांवों के मकानों में पानी भर गया है। एनडीआरएफ की टीम बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में जुटी है। गेंता, रघुनाथपुरा, कीरपुरा, राजपुरा, नारायणपुरा गांव चारों तरफ से पानी से घिर गए। एनडीआरएफ टीम लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में जुटी है। कीरपुरा के 125 एवं रघुनाथपुरा के ढाई सौ लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया है। पंचायत सचिव को लोगों के खाने-पीनेकी व्यवस्था के निर्देश हैं। इटावा में निचले इलाके के मकान खाली करवाने की मुनादी करवा दी है। लोगों को सरकारी भवनों एवं धर्मशाला में ठहराया जा रहा है। नगर में बाढ़ के हालात को देखते हुए एनडीआरएफ की दो टीमें लगाई गई हैं।

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