
कोटा. मध्यप्रदेश में शुक्रवार को भी भारी बारिश का दौर जारी रहने से गांधी सागर में पानी की लगातार आवक हो रही है। चंबल का जल स्तर बढऩे से कोटा बैराज के 16 गेट खोल 4.50 लाख क्यूसेक पानी की निकासी की गई। राणा प्रताप सागर बांध के सात गेट खोलकर दो लाख 15 हजार क्यूसेक तथा जवाहर सागर से दो लाख 38 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। उधर, गांधी सागर बांध के 12 छोटे व बड़ेे गेट खोले गए हैं। प्रशासन ने कोटा, धौलपुर, सवाईमाधोपुर, करोली में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।
Watch: 13 साल में पहली बार गांधी सागर के खुले 12 गेट, राणा प्रताप और जवाहर सागर के खुले 9-9 गेट, बस्तियां खाली करवाई
वहीं, जिले में दोपहर को फिर से मौसम बदला और आसमान में बादलों की आवाजाही बढ़ गई। 2.7 मिनट पर तेज बारिश का दौर शुरू हुआ जो करीब 38 मिनट तक जारी रहा। बारिश से जहां गर्मी-उमस से राहत मिली वहीं, रास्तों में पानी भरने से लोगों को आने-जाने में परेशानी हुई। सड़कों पर 2 फीट पानी भर गया। वहीं, कुन्हाड़ी की बापू कॉलोनी के घरों में पानी भर गया। चंबल नदी में लगातार पानी की आवक होने से शुक्रवार को बैराज के 14 गेट खोलकर 3.50 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। निचली बस्तियों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए मुनादी करवाई जा रही है।
वहीं, गुरुवार को शहर के अलावा ग्रामीण अंचल में सांगोद, रामगंजमंडी, सीमल्या, सुल्तानपुर, अरण्डखेड़ा, अयाना, इटावा में गुरुवार दोपहर साढ़े तीन बजे के बाद शुरू हुई तेज बारिश का दौर शाम तक जारी रहा। सांगोद में उजाड़ नदी का जलस्तर बढ़ा।
इसी तरह सुल्तानपुर रावतभाटा में शाम साढ़े पांच बजे बाद तेज बारिश शुरू हुई। राणा प्रताप सागर बांध के सात गेट खोलकर पानी की निकासी की जा रही है। जल्द ही दो और गेट खोलने की संभावना है। गुरुवार सुबह करीब छह बजे शुरू हुई मूसलाधार बारिश का दौर 2 घंटे तक चला। इस दौरान करीब एक इंच बारिश दर्ज की गई। इसके बाद शाम पांच बजे दोबारा बारिश का दौर शुरू हुआ। आधे घंटे तेज के बाद रातभर रिमझिम बारिश होती रही। कोटा बैराज के गेट खोले जाने के बाद से नदियो में उफान भी तेज है। चम्बल नदी में उफान से सुल्तानपुर क्षेत्र में कोटसुआं ग्राम पंचायत का बालापुरा गांव का कई दिनों से सम्पर्क पंचायत मुख्यालय से कटा हुआ है। गांववासी सुखलाल मीणा ने बताया एक ओर तो गढ़ी के हनुमान मन्दिर पर रपट पर पानी आने से मार्ग अवरूद्ध है तो दूसरी ओर चामला खाल भी उफान पर है।