
कोटा . कोटा रियासत के दरो-दीवार आज भी राजा और रियाया के खुशनुमा रिश्तों की गवाही देते हैं। रिश्तों की उमंग और उल्लास के साथ जब होली केरंग मिलते, तो यह रिश्ता और भी चटख हो जाता। रियासत काल का कोई भी महल ऐसा नहीं है, जिसमें होली की सतरंगी छटा बिखरी न पड़ी हो। आलम यह था कि हाथी और घोड़ों के साथ कोड़ों से खेली जाने वाली होली का उल्लास बढ़ाने के लिए बूस्टर तक का इस्तेमाल किया जाता था।
#khulkekheloholi : इतिहास ने खोले राज : कोटा में कोड़ों की मार के संग चढ़ता था होली का रंग
गढ़ पैलेस स्थित राजमहल में दायी ओर एक जीना ऊपर की ओर जाता है। जो सीधे लक्ष्मी भंडार में पहुंचता है। राजपरिवार के सदस्य इस जगह लक्ष्मी का पूजन करते थे, इसलिए इसका यह नाम पड़ा, लेकिन इसकी दूसरी बड़ी खासियत है बांई दीवार पर बना आठ फुट का भित्ति चित्र। बूंदी, उनियारा, बीकानेरी और कोटा शैली की विविधताओं के साथ तमाम रंगों से सराबोर इस भित्ति चित्र में महाराव को हाथियों पर बैठे होली खेलते हुए दिखाया गया है। इस भित्ति चित्र की इससे भी बड़ी विशेषता यह है कि इसमें बूस्टर (पंप) में पानी और रंग भरकर हुरियारों के ऊपर रंगों की बौछार करते हुए दर्शाया गया है। करीब 200 साल पहले बनाए गए इस चित्र को देखकर सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोटा में होली का उत्साह किस कदर छाया होता था।
गुलाल में डूबी है अर्जुन महल की होली
हथिया पोल स्थिति करीब 300 साल पुराना अर्जुन महल भी होली के उल्लास से सराबोर है। यहां बने 18 बाई 3 फीट के भित्ति चित्र में घोड़ों पर सवार हुरियारों को होली का उत्सव मनाते दर्शाया गया है। गहरे रंगों के वर्णक्रम वाले इस चित्र को हल्की सलेटी पृष्ष्ठ भूमि पर उकेरा गया है। इस चित्र में रंगों की बजाय हुरियारे लाल गुलाल में डूबे हुए हैं।
Updated on:
1 Mar 2018, 11:07 AM IST
Published on:
1 Mar 2018, 11:07 AM IST
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