
कोटा. अलनिया बांध में चल रही चादर भले ही बीते दो दिन में कमजोर पड़ गई हो और कोटा डैम के बंद दरवाजों ने चंद्रलोई के उफान को थाम रखा हो, लेकिन तीन दिन तक मची तबाही कैथून को गहरे घाव दे गई है। इन जख्मों से उबरने की बात तो कस्बे के बाढ़ प्रभावित 900 परिवार तब सोचें जब पहले वे दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर पाएं। मीरा कॉलोनी से लेकर श्याम नगर, श्रीराम कॉलोनी, गडिय़ा लुहारों की बस्ती और कच्ची बस्ती के इलाकों के ज्यादातर लोगों की सारी जद्दोजहद रोटी के इंतजाम को लेकर ही है। सरकारी दावे बड़े जरूर हैं, लेकिन मौके पर वे बेदम ही नजर आ रहे हैं।
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14 अगस्त की दोपहर को अलनिया बांध के ओवरफ्लो होने के बाद पानी की ऐसी चादर चली कि बांध से निकल कर कैथून के निचले इलाकों में तीखे मोड़ लेकर चंद्रलोई की ओर जाते बरसाती नाले और खाळ पानी से लबालब हो गए। अतिक्रमण के चलते पानी को रास्ता न मिला तो वह पहले भट्टा क्लस्टर को डुबोने के बाद मीरा कॉलोनी होते हुए, श्याम नगर, श्रीराम कॉलोनी और कच्ची बस्ती में जा घुसा। घनी आबादी वाले इलाकों के घरों में सात से आठ फीट तक घुसा पानी रविवार तक पूरी तरह नीचे उतर गया, लेकिन इससे पहले कि लोग संभल पाते रविवार शाम से फिर शुरू हुई बारिश ने उन्हें दहशत में ला दिया।
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भूख से लड़ रहे जंग
सरकारी अमले का दावा है कि उसने प्रभावित इलाके के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ ही उन तक रोजाना तकरीबन डेढ़ हजार खाने के पैकेट पहुंचाने का इंतजाम किया है, लेकिन इन बस्तियों में पहुंची राजस्थान पत्रिका की टीम को यह नाकाफी लगा। 900 से ज्यादा परिवारों का बाढ़ में सब-कुछ तबाह हो चुका है। आलम यह है कि गृहस्थी का सारा सामान डूबने के बाद उनके पास खाना बनाने के लिए फौरी तौर पर कोई इंतजाम नहीं है। ऐसे में सरकारी अमले की ओर से मुहैया कराए गए डेढ़ हजार खाने के पैकेट उनके लिए ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहे हैं। गुरुद्वारा अगमगढ़ साहेब और सिविल डिफेंस समेत कुछ सामाजिक संस्थाओं के लोग घर घर जाकर खाना जरूर मुहैया करा रहे हैं, लेकिन सभी तक उनकी पहुंच अब भी मुश्किल ही नजर आ रही है।
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धूप निकले तो भरें घाव
कैथून में दो दिन से बारिश नहीं हुई, लेकिन गृहस्थी का सामान तरबतर है। मीरा बस्ती के राधेश्याम बताते हैं कि पहले पानी और फिर कीचड़ ने सब तबाह कर दिया है। कपड़े-लत्ते और बाकी सामान सुखाने के लिए छतों पर तो डाला है, लेकिन धूप के बिना उसके सूखने की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं है। रविवार शाम को फिर से हुई तेज बारिश से लोग फिर दहशत में आ गए। हालांकि बारिश थमने के बाद उन्होंने राहत की सांस ली।
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पानी तक मयस्सर नहीं
कस्बे के लोगों को पेयजल के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। फायर ब्रिगेड और टेंकरों से पेयजल सप्लाई की जा रही है। जिन इलाकों में सबमर्सिबल पंप लगे हैं वहां जनरेटर से पानी सप्लाई की कोशिश की जा रही है, लेकिन कस्बे के ज्यादातर इलाकों में हालात विकट हैं।