
झालावाड़. देश के प्रधानमंत्री भले ही हर व्यक्ति से खादी खरीदने की अपील कर लोगों को रोजगार मुहैया कराने की बात कर रहे हैं लेकिन झालावाड़ जिले में हालात इसके उलट है। यहां बकानी पंचायत समिति के मोलक्या कलां में संचालित खादी आश्रम एक दशक से बंद पड़ा है। ऐसे में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सपने को साकार करने की दिशा में खादी उद्योग को बढ़ावा देने एवं लोगों को लघु उद्योग से जोडऩे का सपना अधूरा नजर आ रहा है।
अब ग्रामीण फिर से इसके चलने की आस लगाएं बैठे, लेकिन केन्द्र सरकार व राज्य सरकार खादी को बढ़ावा देने के दावे तो कर रही है, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। इसके चलते यहां के करीब 35 गांवों के ग्रामीणों पर बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं।
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18 वर्ष पहले स्थापना
मार्च 1999 में केन्द्र सरकार की पहल पर विनोबा सेवा समिति जयपुर द्वारा मोलक्या कलां मे खादी आश्रम की शुरुआत खादी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र सरकार में तत्कालीन लघु उद्योग मंत्री रही व वर्तमान मुख्यमंत्री ने खादी आश्रम की नींव रखी थी। तब से 11 वर्षों तक झालावाड़ जिलें के 35 से भी अधिक गांवों के करीब 1500 परिवारों को रोजगार मिल रहा था लेकिन केन्द्र सरकार की उदासीनता के कारण पिछले करीब 8 वर्षों से काम बन्द होने से मशीने भी धूल फांक रही हंै।
खादी का काम करने वाले लोगों ने बताया कि खादी का कपड़ा बनाने के लिए दो प्रकार से काम होता था। इसमें पहले कच्चे सूत की पूणी से चरखे के माध्यम से धागा बनाया जाता था। जिसे कतिन कहा जाता है। धागे के बाद बुनकर कपड़ा तैयार करते हैं, जिले में कतिन के कार्य में 400 तथा बुनकर के काम में 1100 सौ लोग काम कर रहे थे।
कबाड़ में बदल गईं मशीनें
धागे की कटिंग का काम करने वाले लोगों ने बताया कि चरखे से धागा तैयार करने एवं धागे से कपड़े बनाने पर प्रति थान पहले 140 रुपए मिलते थे, जो अब तो बढ़कर ज्यादा हो गए है। एक दिन में करीब 4 सौ 450 रुपए मिल जाते थे। केन्द्र में खादी का काम प्रारंभ करवाने के लिए मुख्यमंत्री एवं केन्द्र सरकार को भी कई बार ज्ञापन भेजे हंै। लेकिन इस दिशा में कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हो पाई है। इसके चलते अब मशीनें कबाड़ में तब्दील होती जा रही है। खादी का काम करने वाले मजदूरों में बकानी क्षेत्र के 20, अकलेरा क्षेत्र के 5, झालरापाटन के 8 व भवानीमंडी के करीब 2 गावों के लोग इस काम में लगे हुए थे।
शेड की राशि भी बाकी
22 मई 2008 को यहां आए योजना आयोग के तत्कालीन उपाध्यक्ष मोंटेकसिंह अहलूवालिया ने बीपीएल परिवारों को चरखा शेड बनाने के लिए 25 हजार रुपए देने की घोषणा की थी। इसके लिए कई लोगों ने स्वयं जेब से पैसे खर्चकर शेड भी बना लिए लेकिन अभी तक 119 लोगों के 25 हजार तथा करीब 300 सौ लोगों के 12500 की दूसरी किश्त बकाया चल रही है। हालांकि कई लोगों को 2009 में प्रथम किश्त मिल चुकी थी। लेकिन अभी भी करोड़ों रुपए शेड के बकाया चल रहे हैं।
इनका कहना है...
मजदूर मोलक्या कलां मथुरालाल का कहना है कि करीब 8 साल से कताई एवं बुनाई का कार्य बन्द है। अब घर बैठ हैं, पहले सूत कातते थे। अच्छी मजदूरी मिल जाती थी। फिर से केन्द्र शुरू हो तो अच्छा है।
बड़ोदिया मोहन बाई कारपेंटर का कहना है कि आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों ने खादी से जुड़ कर लाभ उठाया था। लेकिन 7-8 वर्ष से काम बन्द होने से लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। लोगों को काम की तलाश में अन्य दूसरे गांवों मे पलायन करना पड़ रहा है।
मोलक्या कलां अली हुसैन का कहना है कि खादी आश्रम बंद होने से लोगों को परेशानियां उठानी पड़ रही है आश्रम में लगी लाखों रुपए की मशीनें खराब हो रही है। राज्य सरकार से इसे चालू करवाने के लिए कई बार ज्ञापन दिये है। ये फिर से चालू हो तो काम करेंगे।
मोलक्या कलां से बापूलाल का कहना है कि खादी उद्योग बंद होने के बाद बेरोजगार घूम रहे हैं, उस समय 3 से 4 सौ रुपए मिल जाते थे। सारा काम आता है, उद्योग चालू हो तो काम करेंगे।
व्यवस्थापक खादी आश्रम मोलक्या कलां बकानी गिरीराज शर्मा का कहना है कि खादी ग्रामाद्योग 2010 से बंद है, अधिकारी के फोन तो आते हंै, हो सकता है, इस वर्ष चालू हो जाएं।
कार्रवाई करेंगे
झालावाड़ जिला कलक्टर डॉ.जितेन्द्र कुमार सोनी का कहना है कि मोलक्या कलां में खादी ग्रामोद्योग के बारे में जिला उद्योग केन्द्र से सूचना मांगी गई है। क्यों बंद हुई है, इसे दिखवाकर कार्रवाई करेंगे।
Published on:
05 Oct 2017 06:20 pm
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