22 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

शिक्षा नगरी में खुलेआम पनप रहा नशे का कारोबार

100 एमएल की शीशी में होता है शराब की एक बोतल से भी ज्यादा नशा
2 min read
Google source verification
syrup

syrup

कोटा. खांसी की दवा यानी कफ सीरप के नाम पर कोटा में खुलेआम नशे का कारोबार हो रहा है। नशे के कारोबारी एनडीपीएस एक्ट में प्रतिबंधित सॉल्ट की दवाएं धड़ल्ले से बेच रहे हैं। शराब की एक बोतल से भी ज्यादा सुरूर देने वाली कफ सीरप की छोटी-छोटी शीशियां हिमाचल की ड्रग फैक्ट्रियों से सीधे कोटा पहुंच रही है। आलम यह है कि शहर में हर महीने सवा करोड़ रुपए से ज्यादा की कीमत के प्रतिबंधित सॉल्ट वाले कफ सीरप बेचे जा रहे हैं।
नशे के रूप में कोटा के बाजार में कोडेन, फैंसीडिल और क्लोनजीपाम आदि सॉल्ट की दवाएं खपाई जा रही हैं। दवा के नाम पर तैयार किए जा रहे इन कफ सीरप में प्रतिबंधित सॉल्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है। जबकि एनडीपीएस एक्ट के तहत इन सॉल्ट को काफी समय पहले प्रतिबंधित किया जा चुका है। अधिकांश दवाएं हिमाचल प्रदेश के मंडी और बद्दी स्थित फार्मास्युटिकल्स जोन की कंपनियों में बनी हैं। जहां से ट्रांसपोट्र्स के जरिए कोटा तक इनकी सीधे सप्लाई की जा रही है। इतना ही नहीं, सिर्फ डॉक्टर के पर्चे पर ही मिलने वाली स्पाजमो प्रोकिज, कोडस्टर, फीनोबर्बिटोन सीरप भी मेडिकल स्टोर तक पहुंचने से पहले ही ट्रांसपोर्टरों के जरिए सीधे नशाखोरी के ठिकानों पर भेजे जा रही हैं।

Read More:देह व्यापार जैसे संगीन जुर्म में लिप्त नज़र आई खाकी

फैंसीडिल में है घातक नशाफैंसीडिल में है घातक नशा
फैंसीडिल सीरप की 100 एमएल की शीशी में 10 एमएल कोडिन फॉस्फेट होता है, जो शराब की पूरी एक बोतल से भी ज्यादा मदहोशी चढ़ा देता है। जिसके चलते नशे के आदी हो चुके युवाओं की जुबान पर इसका स्वाद बुरी तरह से चढ़ चुका है। कोटा में कफ सीरप के नाम पर नशे का कारोबार करने वाले ड्रग माफिया हर महीने हिमाचल प्रदेश से करीब 800 गत्ता माल मंगवा रहे हैं। एक गत्ते में फैंसीडिल सीरप की 80 शीशियां होती हैं। इस तरह कोटा में हर महीने इसकी 64 हजार शीशियां सप्लाई की जा रही हैं। एक शीशी की कीमत करीब 100 रुपए है, लेकिन काला कारोबार करने वाले इसे 100 रुपए से ज्यादा की कीमत पर बेचते हैं। यानी हर महीने सवा करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कफ सीरप के नाम पर की जा रही है।

Read More:पेट दर्द पर मरीज चिल्लाता रहा, नहीं किया भर्ती, टूटा दम

ऐसे खुली पोल
सेंट्रल नारकोटिक्स के अधिकारियों के मुताबिक फैंसीडिल सीरप बनाने वाली हिमाचल प्रदेश की कंपनी ने दिल्ली की पूजा रोडलाइंस के जरिए 2000 गत्ते बुक किए। जिन्हें अंबाला, गुरुग्राम, गाजियाबाद, रामपुर और मथुरा के रास्ते कोटा तक सप्लाई किया जाना था, लेकिन एक ज्वाइंट ऑपरेशन में दिल्ली क्राइम ब्रांच और यूपी के ड्रग डिपार्टमेंट ने इसे धर दबोचा। जिन लोगों के नाम पर यह माल कोटा भेजा गया था सेंट्रल नारकोटिक्स अब उनसे पूछताछ की तैयारी कर रहा है। जिसके बाद ही कोटा में नशे का काला कारोबार करने वालों के चेहरे बेनकाब हो सकेंगे।

"कोटा में नशे के सॉल्ट वाली कफ सीरप आती तो हैं, लेकिन इतनी बड़ी खेप को खपाने की जानकारी अभी तक नहीं है। किसी स्टॉकिस्ट को महीने में कोरेक्स की 500 शीशियों से ज्यादा मंगानी होती है, तो उसके लिए भी पहले वजह बताते हुए परमिशन लेनी पड़ती है। ऐसे में फैंसीडिल सीरप की 800 शीशियों के हर महीने सप्लाई का मसला तो बेहद गंभीर है। हम इसकी गहनता से जांच करेंगे। "
-देवेंद्र गर्ग, ड्रग इंस्पेक्टर, कोटा