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ज्वाइंट रिप्लेसमेंट के क्षेत्र में कोटा बना मिसाल

बेहतर सुविधा और कम खर्च के चलते बढ़ रही कोटा की धाक
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कोटा

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Zuber Khan

•

Jun 21, 2018

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कोटा. कोचिंग में ब्रांड बन चुके कोटा की धाक अब चिकित्सा क्षेत्र में भी बढ़ रही है। खासकर अस्थि रोग में इलाज का कोटा का जलवा कोटा संभाग और समीपवर्ती जिलों में ही नहीं, अन्य प्रदेशों तक पहुंच रहा है। एमपी व यूपी से भी बड़ी संख्या में मरीज यहां इलाज के लिए पहुंच रहे। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अस्थि रोग के मामलों में औसतन 30 रोगी प्रतिमाह दूसरे प्रदेशों से आ रहे हैं। पिछले एक साल में ही बाहरी प्रदेशों के रोगियों के 30 से अधिक तो ज्वाइंट रिप्लेसमेंट हो चुके हैं। साधारण फ्रेक्चर के ऑपरेशन भी बड़ी संख्या में हुए। मंगलवार को उत्तर प्रदेश के मथुरा निवासी चन्द्रभान (81) का सफल ऑपरेशन किया गया। अस्पताल में 2013 से ज्वाइंट रिप्लेसमेंट के ऑपरेशन शुरू हुए थे।

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यह है वजह
जानकार बताते हैं कि उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश में अस्थि रोग का इलाज राजस्थान से कहीं अधिक महंगा है। इसलिए इन प्रदेशों से रोगी कोटा आ रहे। यहां प्रदेश से बाहर के रोगियों से भामाशाह में उपचार जितनी पैकेज राशि जमा करा ली जाती है। इन्हें यह उपचार सस्ता पड़ता है।

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2 लाख का ऑपरेशन हो रहा 60 हजार में
अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश गोयल ने बताया कि निजी चिकित्सालय में ज्वाइंट रिप्लेसमेंट का ऑपरेशन डेढ़ से दो लाख रुपए तक बैठता है। जबकि नए अस्पताल में 60 से 65 हजार रुपए के खर्च में यह ऑपरेशन हो रहा है। चार से पांच दिन में मरीज की छुट्टी कर दी जाती है।

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"बेहतर सुविधाएं और अपेक्षाकृत कम खर्च में उपचार की वजह से दूसरे प्रदेशों से मरीज कोटा में अस्थि से जुड़े उपचार के लिए आ रहे हैं। इन प्रदेशों से ज्वाइंट रिप्लेसमेंट ऑपरेशन कराने वाले मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। सामान्य फ्रेक्चर के रोगी भी यहां तेजी से बढ़ रहे हैं। करीब 30 रोगी प्रतिमाह दूसरे प्रदेशों के यहां आ रहे हैं।"
-डॉ. राजेश गोयल, विभागाध्यक्ष अस्थि रोग, मेडिकल कॉलेज अस्पताल