अधिकारियों से विश्वास उठा, धारीवाल जी अब आप का ही आसरा ! व्यापारी बोला चक्कर लगाते लगाते बीमार हो गया

अधिकारियों से विश्वास उठा, धारीवाल जी अब आप का ही आसरा ! व्यापारी बोला चक्कर लगाते लगाते बीमार हो गया

Suraksha Rajora | Publish: Jul, 26 2019 05:45:27 PM (IST) | Updated: Jul, 26 2019 05:46:52 PM (IST) Kota, Kota, Rajasthan, India

नगर निगम में कामकाज का पहिया पटरी से उतरा...


कोटा . नगर निगम में कामकाज का पहिया पटरी से उतर गया है। लोग निगम के चक्कर लगाने को विवश हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। निगम में बकाया भुगतान की फाइलों पर अधिकारी कुण्डली मारकर बैठे हैं। कोई फाइल छह माह से तो कोई तीन माह से दबा रखी है। इसका खमियाजा निगम को भी रहा है और जनता को भी।


राज्य सरकार के आदेश पर सभी 65 वार्डों में सफाई कर्मचारियों की बायोमैट्रिक मशीनों से हाजरी लगाने के लिए मशीनें लगाई गई थी। कम्पनी ने मशीनें लगा दी, लेकिन निगम ने कम्पनी को भुगतान नहीं किया तो परेशान होकर कम्पनी ने सेवाएं बंद कर दी। बायोमैट्रिक मशीनों का संचालन बंद होते ही स्वास्थ्य अनुभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मौज हो गई।

फर्जी हाजिरी का खेल शुरू हो गया। अधिकारियों को पता है कि कम्पनी ने दो-तीन महीने से बायोमैट्रिक मशीनों का संचालन बंद कर दिया है, लेकिन अधिकारी जानकर भी अनजान बने हुए हैं। उनका कहना था कि बायोमैट्रिक मशीनें बंद होने की शिकायतें आ रही हैं, उसे दिखवा रहे हैं। जबकि कम्पनी के प्रतिनिधि ने आयुक्त और उपायुक्त को मशीनों का संचालन बंद करने की सूचना लिखित में दी है।


इधर भी भुगतान की फाइलों पर धूल


नगर निगम प्रशासन और मेला समिति कागजों में भले ही दशहरा मेले की तैयारियों की बातें कर रही हो, लेकिन हकीकत यह है कि पिछले साल के मेले के कार्यक्रमों के ही अभी तक लाखों रुपए का भुगतान बकाया है। पूरा साल बीतने को आया है और दूसरा मेला आने वाला है, लेकिन भुगतान की फाइलें अफसरों की टेबलों पर ही धूल खा रही हैं।

मेले में टेंट लगाने वाले ने नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल को शिकायत भेजी है कि पिछले सात महीने से निगम के बकाया भुगतान के लिए बीस चक्कर लगा चुका है। भुगतान नहीं होने से मानसिक दबाव के कारण बीमार हो गया, लेकिन कोई नहीं सुन रहा। अधिकारियों ने भुगतान की फाइल क्यों दबा रखी है, यह भी नहीं बता रहे।

यह पीड़ा केवल टेंट व्यवसायी की ही नहीं है, राम बारात, इवेंट कम्पनी के प्रतिनिधियों की भी है।यह तो बता दो भुगतान क्यों नहीं हो रहा अग्रवाल टेंट के जवाहर बसंल ने निगम आयुक्त को भेजे पत्र में कहा कि दशहरा मेला-2018 में 42 लाख रुपए का टेंट लगाया था। इसका बिल निगम में दिया जा चुका है। मेला समिति ने जांच कर मार्च में भुगतान की पत्रावली आयुक्त को भेज दी, लेकिन फिर भी भुगतान नहीं हो रहा।

अब तक बीस से अधिक चक्कर लगा चुका हूं, लेकिन भुगतान नहीं करने का कोई कारण भी नहीं बता रहे हैं। निगम के चक्कर लगाकर बीमार हो चुका हूं। आखिर बिल रोकने की मंशा क्या है, यह स्पष्ट करें। इस पत्र की प्रति स्वायत्त शासन मंत्री को भी भेजी है।


राम बारात का भुगतान भी नहीं किया
पिछले मेले में निकाली गई राम-बारात का भी अभी तक भुगतान नहीं किया गया है। यह मामला पिछले दिनों मेला समिति में भी उठाया गया था। इसी तरह इवेंट कम्पनी का भुगतान भी अटका रखा है। साउण्ड वालों के भुगतान की फाइल निगम में दबा रखी है। मेले के कार्यक्रम में दो उद्घोषक लगाए गए थे, उनके भुगतान की फाइल भी इधर-उधर दौड़ रही है। मेला समिति सदस्य नरेन्द्र हाड़ा ने कहा कि निगम इस तरह बिलों के भुगतान रोकेगा तो कौन मेले में आएगा।

इस तरह तो मेले को भव्य रूप देने की बात कर रहे हैं, दूसरी तरफ भुगतान नहीं होने से बुरा असर पड़ रहा है। मेले के सभी तरह के बकाया भुगतान करने का मसला पिछली बैठक में प्रोसेडिंग में शामिल हो गया है। अधिकारियों को स्पष्ट कहा गया है कि शीघ्र भुगतान करें। इस बारे में फिर फोलोअप करेंगे।
राममोहन मित्रा, अध्यक्ष मेला समिति नगर निगम

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