
कोटा।
प्रसाविका का बकाया वेतन बिल पास करने की एवज में 16 साल पहले रिश्वत लेते गिरफ्तार हुए उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय अकलेरा के तत्कालीन कनिष्ठ लिपिक व कैशियर को अदालत ने सोमवार को 4 साल व 3 साल की सजा से दंडित किया है। साथ ही उन पर 13-13 हजार रुपए जुर्माना भी किया है।
नयापुरा निवासी रमा कुमावत ने 30 मई 2001 को एसीबी झालावाड में शिकायत दी थी। जिसमें कहा था कि वह सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मनोहर थाना के उप केन्द्र पिंडोला में प्रसाविका के पद पर कार्यरत है। उसका वेतन बिल अकलेरा स्थित उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से बनता है। उसका नवम्बर 2000 व फरवरी 2001 से मई 2001 तक 5 माह का वेतन बिल बकाया था।
जिसका भुगतान करने की एवज में उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय अकलेरा के वरिष्ठ लिपिक ओम प्रकाश गुप्ता व कनिष्ठ लिपिक राम कल्याण मीणा 500-500 और कैशियर कैलाशचंद 200 रुपए रिश्वत की मांग कर रहे हैं। जबकि वह रिश्वत नहीं देना चाहती। शिकायत का सत्यापन करने के बाद एसीबी झालावाड की टीम ने तीनों को 7 जून 2001 को मांगी गई रिश्रत राशि लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
सहायक निदेशक अभियोजन एहसान अहमद ने बताया कि जांच के बाद एसीबी झालावाड ने तीनों के खिलाफ 31 मार्च 2003 को चालान पेश किया था। अभियोजन पक्ष की ओर से 18 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। मुकदमें की ट्रायल के दौरान ओम प्रकाश गुप्त की मूत्यु होने से उसके खिलाफ 7 अक्टूबर 2017 को कार्यवाही ड्रॉप कर दी गई। जबकि रिश्वत लेने का दोषी मानते हुए अदालत ने राम कल्याण मीणा को 4 साल कठोर कैद व 13 हजार रुपए जुर्माने से और कैलाश चंद को 3 साल कैद व 13 हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया है।
Published on:
23 Oct 2017 07:46 pm
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