
कोटा . हाड़ौतीभर में प्रसिद्ध नयापुरा की आदर्श होली इस बार मणप्पुरम फाइनेंस लूट की घटना को झांकियों से बताएगी। होली की झांकी में 27 किलो सोना कैसे लूटा गया, इसे बताया जाएगा। लुटेरों के घुसने से लेकर भागने तक का घटनाक्रम दिखाया जाएगा। इन झांकियों में लुटेरों का दुस्साहस व पुलिस की नाकामी को उजागर किया जाएगा।
आदर्श होली संस्थान के अध्यक्ष राकेश शर्मा ने बताया कि झांकियों में रामसेतू की झांकी भी बनाई जा रही है, जिसमें पानी में तैरते पत्थर व सोने की लंका दिखाई देगी। वानर सेना और भगवान राम शिव पूजन करते दिखेंगे। इसके साथ ही द्रोणाचार्य और एकलव्य की झांकी, बच्चों द्वारा माता-पिता को छोड़कर वृद्धाश्रम में भेजने के दृश्य को भी झांकी में दिखाया जाएगा।
Read More: सरकार ने वापस लिया काला कानून तो हाड़ौती ने मनाया जश्न, कोटा में नजर आया दीपावली सा माहौल
पिचकारी-रंगों पर जीएसटी की मार
बाजार में इस बार रंगों व पिचकारियों पर जीएसटी की मार दिखाई दे रही है। रंगों और पिचकारियों पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगाया गया है। बाजार में अभी रौनक कम है। थोक व्यापारी नरेश माखीजा ने बताया कि रंग, पिचकारी, गुलाल, स्प्रे सहित कई आइटम महंगे हो गए हैं। दिल्ली से आने वाले सभी माल पर जीएसटी लग रहा है। हाड़ौती में गांव व दूरदराज से आने वाला व्यापारी बहुत कम माल लेकर जा रहा है। पिचकारी 20 रुपए से 1500 रुपए तक हो गई है।
Read More: khulkarkheloholi : राजस्थान के इस नंदग्राम में खेली जाती है कोड़ामार होली
झाडू से निकलेगी सतरंगी बौछार
होली पर कई तरह की पिचकारियां बाजार में उपलब्ध हैं। सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाली झाडू है, जो अपने अंदर समेटे विभिन्न रंगों की बौछार करेगी, गब्बारे भी छोडेग़ी। बाजार में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पिचकारी की सबसे अधिक डिमांड है। इसके साथ ही स्पाइडर मैन, छोटा भीम, मकड़ी, बड़ी मछली, पम्प, वाटर टैंक सहित कई तरह की पिचकारियां हैं। रंगों में आरारोट, चोक रंग, फूलों का रंग पसंद किया जा रहा है।
Read More: बाजारों में दिखने लगे होली के रंग, बच्चों के पसंदीदा कार्टूनों की पिचकारियों की दिखी भरमार...देखिए तस्वीरें
पारम्परिक प्रथाएं हो गई लुप्त, सोशल मीडिया तक सिमटी
सबसे पुरानी होली सब्जीमंडी की है, आजादी के समय से मनाई जा रही। पहले गढ़ पैलेस से अग्नि आती थी, उससे होली का दहन किया जाता। सबसे पहले यहां लालटेन व दीपकों से सजावट की गई थी। पहली बार हाड़ौती संभाग में विद्युत सज्जा भी यहीं की गई थी। इतिहासविद् बताते हैं कि कोटा में जितने भी दरवाजे हैं, उनके पास खाल बनाए जाते थे, जिनमें रंग घोला जाता था और राजपरिवार की सवारी निकलती थी। प्रजा रंगों की बौछार करती थी, लेकिन अब ये सभी प्रथाएं लुप्त हो गई हैं। अब सोशल मीडिया पर कई तरह के कमेंट, चुटकुले, संदेश पहले ही अपना रंग जमाने लगे हैं।
Updated on:
20 Feb 2018, 10:37 AM IST
Published on:
20 Feb 2018, 10:26 AM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.