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Farmers’ suicides: बारां में एक और किसान ने की आत्महत्या, लहसुन के भाव सुन हुआ बेहोश, घर आकर खाया जहर

परिजनों ने कहा लहसुन का भाव कम था, कर्ज नहीं चुका पा रहे थे ,पुलिस का कहना है कि लहसुन फसल ही नहीं थी
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कोटा

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Zuber Khan

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Updated: 25 May 2018, 10:27 AM IST

Farmers' suicides

कर्ज के बोझ से दबे अन्नदाता ने जहर खाकर दी जान

कोटा/बारां. 5 साल पहले तक मुनाफे की खेती समझी जाने वाली लहसुन की खेती हाड़ौती के किसानों के लिए मौत का कारण बनती जा रही है। लहसुन के कम भाव मिलने, सिर पर कर्जा होने व परिवार का पालन पोषण करने की चिंता में डूबे किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं। बुधवार रात कवाई थाना क्षेत्र के बलदेवपुरा गांव में एक किसान ने विषाक्त खाकर आत्महत्या कर ली। रात्रि में उपचार के लिए बारां से कोटा ले जाते समय रास्ते में उसका दम टूटा। परिजनों ने थाने में दी रिपोर्ट में कहा कि लहसुन का भाव कम लगने व कर्ज नहीं चुका पाने से आत्महत्या की। जबकि कवाई पुलिस का कहना है कि मृतक के लहसुन की फसल ही नहीं थी।


मृतक के पुत्र मेघराज ने थाने में दी रिपोर्ट में बताया कि उसके पिता चतुर्भज मीणा (58) तीन-चार दिन पहले लहसुन बेचने छीपाबड़ौद मंडी में गए थे। वहां लहसुन का भाव500-600 रुपए प्रति क्विंटल लगा। वे इसे वापस ले आए। तब से ही वह गुमसुम थे। बुधवार शाम को उन्होंने जहरीला पदार्थ खा लिया। तबीयत बिगडऩे पर परिजन उन्हें रात्रि में पहले अटरू अस्पताल लाए, यहां से बारां रैफर कर दिया और बारां से कोटा।

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कोटा ले जाते समय रास्ते में किसान का दम टूट गया। परिजन वापस अटरू अस्पताल लाए। यहां गुरुवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। गौरतलब है कि हाड़ौती में पिछले एक साल में 11 किसान जान गंवा चुके हैं। चालू सीजन में ही 5 किसानों की जान चली गई है।

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पुलिस जांच शुरू
ग्रामीणों ने कहा कि मृतक ने सात बीघा में मुनाफा काश्त कर लहसुन की फसल की थी। वहीं कवाई थानाधिकारी दलबीर सिंह फौजदार ने बताया कि मृतक के पास कोई जमीन नहीं थी। जो थी वह भी तीनों बेटों में बांट रखी थी। थानाधिकारी ने कहा कि ग्रामीणों से भी पता किया गया था जिसमें उसके द्वारा लहसुन की फसल की बुआई नहीं करना सामने आया, फिर भी पुलिस ने मृतक के बेटे मेघराज की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।

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बारां जिले में तीसरी मौत
इससे पहले जिले की अटरू तहसील के रहलाई गांव निवासी कृषक रेवड़ीलाल मेघवाल की विषक्त सेवन करने से १९ अप्रेल को मृत्यु हुई थी। वहीं गत 8 मई को निकटवर्ती खैराली गांव निवासी एक किसान ने आर्थिक तंगी व कर्ज से परेशान होकर पेड़ पर लटककर आत्महत्या कर ली थी।

बाजार हस्तक्षेप योजना से भी नहीं मिल रही राहत

किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने भले ही बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत लहसुन की खरीद शुरु कर दी है। इसके तहत 25 एमएम मोटाई तक का लहसुन 3257 रुपए प्रति क्विंटल के भाव में अधिकतम 40 क्विंटल लहसुन ही खरीदा जा रहा है। अव्वल तो यह भाव भी किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है। इसके अलावा पेचीदगियां इतनी हैं कि लक्ष्य के मुकाबले डेढ़ फीसदी लहसुन की भी खरीद नहीं हो पाई है। इधर, बाजार में कौडि़यों के भाव मिल रहे हैं, लागत भी नहीं निकल पा रही है।

सालभर में इन 11 किसानों ने गंवाई जान

1. सत्यनारायण मीणा, रौण (इटावा), जिला कोटा, 3 जून 2017

2. संजय मीणा, सकरावदा (नाहरगढ़) जिला बारां, 21 जून 2017

3. बगदीलाल राठौर, सुनेल, जिला झालावाड़, 23 जून 2017

4. शेख हनीफ डग, जिला झालावाड़, 24 जून 2017

5. मुरलीधर मीणा, श्रीपुरा (इटावा) जिला कोटा, 27 जून 2018

6. बनवारीलाल मालव किशनगंज (सुल्तानपुर) जिला कोटा, 7 जुलाई 2017

7. रेवड़ी लाल मेघवाल, रहलाई (अटरू), जिला बारां, 19 अप्रेल 2018

8. लक्ष्मीचंद सुमन, कजलिया (इटावा), जिला कोटा, 23 अप्रेल 2018

9. महावीर धाकड़ खैराली (किशनगंज), बारां जिला 8 मई 2018

10. हुकमचंद मीणा, बृजनगर (देवली मांझी), जिला कोटा 23 मई 2018

11. चतुभुज मीणा, बदलदेवपुरा (कवाई), जिला बारां, 24 मई 2018