
कोटा. कोटा जिले के पीपल्दाकलां क्षेत्र में स्थित 16 बीघा ज्वार का खेत जहरीला ( Poison in Sorghum crop ) हो गया। फसलें खाने से करीब 45-50 गायें अचेत हो गई। समय पर इलाज नहीं मिलने से करीब 25 गायों की मौत हो गई। ( Cows Death ) घटना से क्षेत्र में हड़कम्प मच गया। ग्रामीणों की सूचना पर पशु चिकित्सालय से डॉक्टर्स की टीम व प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और खेत पर अचेत पड़ी गायों का तुरंत इलाज शुरू किया। इससे करीब 23 गायों की जान बच गई। प्रशासन ने खेत मालिकों को फसलों की हंकाई करने के लिए पाबंद कर दिया है।
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जानकारी के अनुसार पीपल्दाकलां कस्बे में सूखनी नदी के पास एक किसान के 16 बीघा खेत हैं। जहां उसने ज्वार की फसल की हुई है। फसल को लंबे समय से पानी नहीं मिलने पर ज्वार जहर में तब्दील हो गई। ( Poison in Sorghum crop ) आसपास के गांवों से खेतों में चरने आई गायों ने जैसे ही फसल खाई तो जहर के प्रभाव से सभी अचेत हो गई। इस दौरान यहां से गुजर रहे लोगों ने बड़ी संख्या में गायों को अचेत पड़ा देखा तो पुलिस व प्रशासन को सूचना दी। इस पर प्रशासनिक अधिकारी के साथ पशु चिकित्सक मौके पर पहुंचे तब तक 25 गायों की मौत हो चुकी थी। जबकि, आफरा आने से अचेत हुई गायों का तुरंत इलाज शुरू कर बचा लिया गया।
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पानी की कमी से जहर बन जाती है ज्वार
पशु चिकित्सक अब्दुल सलीम ने बताया कि ज्वार की फसलों को नियमित पानी नहीं मिले तो उसमें अपने आप जहर फैल जाता है। यहां फसलें डेढ़-दो माह की हो चुकी है, पानी की कमी वह जहर में तब्दील हो गई। फसल चरने के दौरान गायें आफरा गई और अचेत हो गई। जहर के प्रभाव से पाचन क्रिया बंद होना, सांस में तकलीफ होना, लडखड़़ाकर चलना, उठने में असमर्थ होना, आफरा आना एवं लार टपकना उल्टी करने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने से मौत हो जाती है।
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खेत मालिक को इंकाई के लिए किया पाबंद
तहसीलदार व एसडीएम ने खेत मालिक को तुरंत ज्वार की फसल की हंकाई करने को पाबंद कर दिया है। वहीं, आसपास के क्षेत्रों के किसानों को फसलों में पानी छोडऩे की हिदायत दी है। वहीं, पशुपालकों ने प्रशासन से उचित मुआवजे की मांग की है।