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दशहरा मेला में उतरा राजस्थानी लोक संस्कृति का चांद

फलक पर चमकते चांद और दशहरा मेला के मंच पर घूमर, मोरिया, भंवई नृत्य के साथ राजस्थानी लोकनृत्य के फ्यूजन की छटा देखते ही बन रही थी।
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Rajasthani cultural program in Dussehra fair Kota

जैसे-जैसे शरद पूर्णिमा का चांद आसमान में आभा बिखेरता गया, वैसे-वैसे राजस्थानी लोक कलाकारों व गायकों का उत्साह बढ़ता गया। दशहरा मेले में विजयश्री रंगमंच पर राजस्थानी सांस्कृतिक कार्यक्रम में कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दी, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा। जयपुर के कलाकारों ने देवों की माता, थाने मनावां... भजन पर नृत्य किया। बाद में गायिका चंचल ने राजस्थानी गीतों की छटा बिखेरते हुए बाई सा रा बीरा..., म्हारी रुणक-झुणक पायल बाजे गीत सुनाया। किशनगढ़ से आए ग्रुप ने म्हाने लेता आईजो, घुमेरदार लहंगो राजस्थान गीत पर प्रस्तुति दी।







धरती धोरां री...
मांड गायक दिलबर खान ने तालरिया, मगरिया रे, मारू थारा देस में, म्हारी रे मंगेतर नथड़ी हाळी, मूंछया हाळो रे नवाब, म्हारी रे मंगेतर हो। संकल्प गु्रप की ओर से राजस्थानी फ्यूजन पर जुगलबंदी करते हुए लाइव बैंड का प्रदर्शन किया गया। जयपुर से आए विनोद कमली सपेरा गु्रप के कलाकारों ने कालबेलिया नृत्य कर दर्शकों को रोमांचित कर दिया। जयपुर के दूसरे ग्रु्रप के कलाकारों ने घूमर, मोरिया, भंवई नृत्य की प्रस्तुतियां दी। अंत में धरती धोरां रे गीत पर कलाकारों ने नृत्य किया। जिसे देख हर राजस्थानी गौरव से झूम उठा।

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आज होगी कव्वाली

मेला समिति अध्यक्ष राममोहन मित्रा ने बताया कि शुक्रवार रात 8 बजे से दशहरा मेला के विजयश्री रंगमंच पर कव्वाली कार्यक्रम होगा। इसमें मुंबई के कव्वाल रईस मियां कव्वाली पेश करेंगे। वहीं शाम 7 बजे यूआईटी ऑडिटोरियम में शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम होगा। मुंबई की पूजा गायकोड़े की प्रस्तुति होगी।

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शनिवार को जमेगा कवियों का अखाड़ा

विजयश्री रंगमंच पर शनिवार को अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा कवि सम्मेलन होगा। इसमें दुर्गादान सिंह गौड़, मुकुट मणिराज, अंबिकादत्त चतुर्वेदी, गौरव प्रचंड, राजकुमार बादल, बाबू बंजारा, कैलाश मंडेला, गोविंदा हांकला, गिरीश विद्रोही, प्रेम शास्त्री, विश्वामित्र दाधीच, रामनारायण हलधर, मुरलीधर गौड़, भूपेंद्र गौड़, राजेंद्र पंवार, कमलेश कोकिल, सोहनलाल चौधरी, कानू पंडित, देशबंधु दाधीच काव्यपाठ करेंगे।