
Rajasthani kavi sammelan organized at Kota Dussehra Mela
मोदी की नोटबंदी की तारीफ करते हुए जब राजस्थानी कवियों ने कविताएं पढ़ना शुरू की तो जनता ने जमकर सराहना की। राजस्थानी कवियों की कविता पर कोटा के दशहरा मेला में राजस्थानी भाषा कवि सम्मेलन में जमकर तालियां बजी। विभिन्न रस के डेढ़ दर्जन कवियों ने भोर तक श्रोताओं को काव्यरस में डुबाए रखा। एक से बढ़कर एक काव्य रचनाओं से श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। श्रोताओं ने भी कवियों के शब्दबाणों का तालियां बजाकर स्वागत किया।
शुरूआत गीतकार मुकुट मणिराज ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। बाद में लाखेरी के वीर रस के कवि भूपेंद्र राठौड़ ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं में देशभक्ति का जज्बा पैदा किया। महाकवि सूर्यमल मिश्रण की धरती बूंदी से आए कवि देशबंधु दाधीच ने चिरपरिचित अंदाज में बफर डिनर बनाम पंगत भोजन व्यवस्था को लपेटते हुए करारा व्यंग्य कसा। मुरलीधर गौड़ ने नोटबंदी के दौरान के हालात जीवंत करते हुए ..'मोटा नोटां पे लगा दी जी लगाम, मोदी जी थानै आछी करी' गीत पढ़ा जिसे भरपूर सम्मान मिला। उन्होंने हाड़ौती अंचल के गीत 'जै घर होता भरतार, मजो दूणो हो जातो जी'... भी सुनाया।
लोगों ने लगाए जमकर ठहाके
जब बारां से आए बाबू बंजारा मंच पर उतरे तो श्रोता उनके बोलने से पहले हंसी के ठहाके मारने लगे। ज्यों ही बंजारा ने बोलना शुरू किया श्रोता लोटपोट हो गए। साथ ही उन्होंने 'काळया भाग चेत ग्या थारा, आछो फेर्यो छे रे झंवरों' गीत सुनाया। साथ ही चित्तौड़ के इतिहास को इंगित करते हुए महाराणा प्रताप व उनके प्रिय घोड़े चेतक की दोस्ती के नाम 'सूतो चेतक रे जाग, धरा की सेवा कर ल्यां रे' गीत सुनाकर लोगों से मातृभूमि की सेवा का आह्वान किया। श्रोताओं की मांग पर बंजारा ने हाड़ौती भाषा का गीत 'नीला लहंगा उपर गोरी थारै मंडर्या गाजर मोर'... सुनाकर वाहवाही लूटी। मीरा पुस्कार से सम्मानित गद्य साहित्यकार अम्बिकादत्त चतुर्वेदी ने अपने काव्य संग्रह नुगरा के बंद सुनाकर श्रोताओं को गंभीर किया।
दोहों ने लूटा मैदान
भीलवाड़ा के शक्करगढ़ से आए कवि राजकुमार बादल ने काव्य की बरसात की तो श्रोता भावों में भीगते रहे। उन्होंने मोबाइल की सेटिंग, क्रिकेट का मैदान आदि कविताएं सुनाई। इसके बाद मंच के शीर्ष गीतकार दुर्गादान सिंह गौड़ ने मंच संभाला तो ग्रामीण परिवेश, परम्परा, ग्राम्य जीवन से सरोबार गीतों को सुनकर श्रोता झूम उठे। रामनारायण हलधर ने अपने हाड़ौती भाषा के दोहे सुनाए। वही हास्य कवि गोविंद हांकला ने टेम्पो, चीज आदि व्यंग्य सुनाए। विश्वामित्र दाधीच, गोरस प्रचंड, प्रेम शास्त्री, कवयित्री कमलेश कोकिल ने भी यहां काव्यपाठ किया।
मणिराज को राजस्थानी भाषा कवि रत्न सम्मान
मंच संचालन कर रहे राजस्थानी भाषा के श्रेष्ठ गीतकार मुकुट मणिराज को नगर निगम की ओर से राजस्थानी भाषा कवि रत्न सम्मान दिया गया। सम्मेलन के मुख्य अतिथि रहे विधायक हीरालाल नागर, कोटा विवि के कुलपति प्रो. पीके दशोरा, आदि ने उन्हें सम्मान भेंट किया। इस दौरान मणिराज ने कहा कि यह सम्मान मेरा नही हैं। इस राजस्थानी, हाड़ौती भाषा का है जिसने हमें इस लायक बनाया है।
Published on:
8 Oct 2017, 4:23 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.