
बरून्धन. रक्षाबंधन का पर्व शुक्रवार को बरून्धन कस्बे में धार्मिक आस्था के साथ लोक-संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया। कस्बेवासियों ने वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के पीछे स्थित तेजाजी महाराज के मंदिर पहुंचकर लोकदेवता को रक्षासूत्र अर्पित किया। इस दौरान क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की गई।
रक्षासूत्र अर्पित करने से पूर्व कस्बे के मुख्य मार्गों से पारंपरिक बिंदौरी निकाली गई। बिंदौरी में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। अलगोजे, ढोलक और मंजीरों की थाप के बीच तेजाजी महाराज के लोकगीत और भजनों की स्वर लहरियां गूंजती रहीं। पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ साउंड सिस्टम ने आयोजन में उत्साह का रंग और गहरा कर दिया।
कच्ची घोड़ी नृत्य ने खींचा ध्यान
बिंदौरी का मुख्य आकर्षण कच्ची घोड़ी नृत्य रहा। महिला और पुरुष कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में पूरे रास्ते लयबद्ध नृत्य करते हुए आगे बढ़े। कलाकारों की प्रस्तुति देखने के लिए रास्ते में जगह-जगह लोग रुक गए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने लोक नृत्य का आनंद लिया।
बुजुर्गों से युवाओं तक दिखा उत्साह
आयोजन में बुजुर्गों ने सफेद साफे धारण कर परंपरा की झलक दिखाई तो युवाओं ने भी पूरे उत्साह के साथ बिंदौरी में भाग लिया। अलगोजे और मंजीरों की जुगलबंदी से कस्बे का माहौल पूरी तरह लोक रंग में डूबा रहा।
परंपरा से नई पीढ़ी को जोड़ने की पहल
बरून्धन में रक्षाबंधन पर आयोजित यह आयोजन केवल धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोक-संस्कृति के संरक्षण और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम भी बना। तेजाजी महाराज के प्रति आस्था के साथ अलगोजा वादन, लोकगीत और कच्ची घोड़ी नृत्य जैसी पारंपरिक लोक कलाओं की प्रस्तुति ने ग्रामीण संस्कृति की जीवंत तस्वीर पेश की।
Updated on:
1 Sep 2026, 2:57 PM IST
Published on:
29 Aug 2026, 6:02 AM IST
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