
BIG NEWS: कोटा के शिक्षक की खोज: अब 700 डिग्री टेंप्रेचर पर भी नहीं फटेगी ट्यूब
कोटा. विकासशील देशों के सुपर क्रिटिकल पॉवर प्लांटों की दक्षता को आसानी से बढ़ाया जा सकेगा। कोटा पॉलिटेक्निकल कॉलेज के शिक्षक ने स्टीम जनरेशन के उच्च ताप के कारण सुपर हीटर सेक्शन में होने वाले ट्यूब फेल्योर को रोकने का रास्ता खोज निकाला है। इससे न सिर्फ पॉवर प्लाटों की दक्षता बढ़ेगी बल्कि ट्यूब फेल्योर के बाद छोड़े जाने वाली गर्म गैसों को नियंत्रित कर पर्यावरण संरक्षित किया जा सकेगा।
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अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल पॉवर प्लांट्स में स्टीम का जनरेशन लगभग 600 डिग्री सेंटिग्रेट तापमान पर होता है। जैसे ही स्टीम जनरेशन के लिए सुपर हीटर का ट्रेम्प्रेचर इससे ऊपर जाता है गर्म गैसों से भरी ट्यूब फट जाती हैं। सुपर हीटर ट्यूब फेल्योर को ठीक करने के लिए पॉवर प्लांट बंद ही करना पड़ता है। जिसके दोबारा चालू करने पर 20 से 25 लाख रुपए का खर्च आता है।
अब नहीं फटेगी ट्यूब
गर्म गैसों के उच्च तापमान के कारण सुपर हीटर ट्यूब के मेटेरियल डिग्रेडेशन को रोकने के लिए राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के यांत्रिकी विभाग के प्रवक्ता डॉ. धर्मेंद्र कुमार जैन ने डॉ. जैन ने सुपर हीटर ट्यूब के माइक्रो स्ट्रक्चरल डिग्रेडेशन को रोकने के लिए ऐसे फाइनमेंट नेनो मेटेरियल के उपयोग की खोज की जिन्हें इस ट्यूब में सुपर इम्पोज कर न सिर्फ इसे फटने से रोका जा सकता है, बल्कि 700 डिग्री सेटिंग्रेड तापमान से भी ज्यादा का स्टीम जनरेशन किया जा सकता है। डॉ. जैन ने बताया कि सुपर हीटर ट्यूब के मेटेरियल में जिरकोनिया या फाइनमेंट को माइक्रो स्ट्रक्चर लेवल पर इम्पोज कर दिया जाए तो ट्यूब गर्म गैसों के उच्च दवाब को आसानी से सहन करने के काबिल बन जाती है। माइक्रो स्ट्रेचर लेवल पर सूक्ष्म परिवर्तनों से ट्यूब की लाइफ दो गुना तक बढ़ाई जा सकती है।
बढ़ेगी प्लांट की दक्षता
डॉ. जैन ने बताया कि खोज के दौरान मिले परिणामओं से साफ है कि यदि सुपर हीटर ट्यूब मेटेरियल में नेनो मेटेरियल को इम्पोज कर दिया जाए तो 700 डिग्री सेंटिग्रेट से भी ज्यादा तापमान पर स्टीम जनरेशन किया जा सकता है। इस तापमान पर भी ट्यूब का फेल्योर न होने से प्लाटं की दक्षता में सात से दस फीसदी तक का इजाफा हो जाता है। डॉ. जैन ने अपना शोध राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के मेटेरियल स्ट्रेक्चर एक्सपर्ट प्रोफेसर डॉ. संजीव मिश्रा और मेवाड़ विश्वविद्यालय के प्रो. राहुल लोढ़ा के निर्देशन में पूरा किया है। शोध के लिए जैन को चित्तौड़ स्थित मेवाड़ विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई है। उनका शोधपत्र इंटरनेशनल जर्नल ऑफ साइंटिफिक रिसर्च में भी प्राकाशित हो चुका है।
Published on:
19 Apr 2019 08:00 am
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