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OMG! बड़ा मंहगा पड़ा सरकारी पौधारोपण, दो हजार में लगा एक पौधा

पौधारोपण के नाम पर सरकारी लूट थमने का नाम नहीं ले रही। आलम यह है कि अफसर दो हजार रुपए में एक पौधा लगा रहे हैं।

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Scam in plantation at Jhalawar

झालावाड़ में सरकारी पौधारोपण खासा मंहगा पड़ा। यहां दो हजार रुपए में एक पौधा लगाया गया। उस पर भी अधिकांश पौधे पनप नहीं सके। आलम यह है कि पौने दो लाख रुपए खर्च करके लगाए गए पौधों में से सिर्फ 73 ही जिंदा बचे। अफसर इसके लिए देखभाल की बजाय प्राकृतिक प्रकोप को ज्यादा जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

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तीन साल तक हुआ पौधारोपण

झालावाड़ जिले के डग-पिपलीया खुर्द सम्पर्क सड़क पर प्रधानमंत्री सड़क योजना कार्यक्रम के अन्तर्गत पौधरोपण किया जाना था, जिसकी स्वीकृति जून 2014 में हुई। इसके अन्तर्गत पौधरोपण कार्य में श्रम व्यय पर 5,30,500 रुपए और सामग्री व्यय पर 6 4,200 रुपए खर्च किए जाने थे। कार्यकारी एजेंसी वन विभाग डग ने वित्तीय वर्ष 2014-15 में तीन मस्टर रोल भरी गई। इसका भुगतान 13,700 रुपए किया। इसी तरह वर्ष 2015-16 में 13 मस्टर रोल का भुगतान 24,776, वर्ष 2016-17 में 15 मस्टर रोल का 20,913 व 2017-18 में 13 मस्टर रोल का 23,654 रुपए का भुगतान किया।

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करीब डेढ़ हजार पौधे लगाए

यहां विभाग द्वारा चार वित्तीय वर्ष में 44 मस्टर रोल भर कर कुल 8 3,043 रुपए का भुगतान नरेगा अन्तर्गत श्रम व्यय पर किया। ग्राम पंचायत द्वारा भी इसी मार्ग पर गत वर्ष नीम पथ का कार्य स्वीकृत किया गया। इसके एवज में बिल नं. 508 के आधार पर धनवंतरी नर्सरी झालरापाटन को 1125 पौधे का 15 रुपए प्रति पौधे के हिसाब से 16 ,8 75 रुपए का भुगतान किया। वहीं ग्राम पंचायत ने नीम पथ को लगाने में 65,598 रुपए और खर्च किए।

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पौने दो लाख खर्च, 73 पौधे ही जीवित

गौरतलब है की वन विभाग और ग्राम पंचायत ने मिलकर इस मार्ग पर 1,6 5,516 रुपए खर्च कर दिए, जबकी संवाददाता ने एक-एक पौधे को गिना तो वास्तविकता में दोनों विभागों ने मिलकर इस मार्ग पर 200 पौधे ही लगा रखे हैं। इनमें से वर्तमान में मात्र 73 पौधें ही जीवित व अर्ध जीवित अवस्था में हैं। ऐसे में यह कहा जा सकता है की सरकारी विभाग के इस एक पौधे की लागत दो हजार रुपए से भी ज्यादा है। वहीं चार वित्तीय वर्ष गुजरने के बाद भी पौधे एक या दो फिट से ज्यादा बड़े नहीं हुए। जिसे लेकर सवाल उठने लगे हैं।

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अफसर दे रहे सफाई

डग के क्षेत्रीय वन अधिकारी अशोक खोजा इसके लिए प्राकृतिक प्रकोप को जिम्मेदार ठहराते हुए कहते हैं कि पुराने लगाए हुए पौधे तो जल गए हैं। जो बचे हैं उन्हें आकर दिखवाते हैं। वहीं विकास अधिकारी सविता राठौर कहती हैं कि विभिन्न कारणों से पौधे जल जाते हैं। जिनको दिखाकर दोबारा लगाया जाएगा।