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स्क्रब टायफस को पहाड़ों से निकाल मैदानी इलाकों में कैसे लाया पिस्सू, दिल-दिमाग पर क्यों करता अटैक, पढि़ए खास रिपोर्ट…

scrub typhus, Symptoms & Diagnosis: पहाड़ों से निकलकर मैदानी इलाकों में तेजी से पैर पसार रही स्क्रब टायफस बीमारी पिस्सूओं के काटने से फैलती है।
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कोटा

•

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Zuber Khan

•

Sep 11, 2019

scrub typhus

स्क्रब टायफस को पहाड़ों से निकाल मैदानी इलाकों में कैसे लाया पिस्सू, दिल-दिमाग पर क्यों करता अटैक, पढि़ए खास रिपोट...

कोटा. पहाड़ों से निकलकर मैदानी इलाकों में तेजी से पैर पसार रही स्क्रब टायफस बीमारी पिस्सूओं के काटने से फैलती है। इसके काटने का पता तक नहीं चलता है। 10 दिन बाद इसके लक्षण दिखना शुरू हो जाते हैं। डेंगू की तरह इसमें भी प्लेटलेट्स की संख्या घटने लगती है। शरीर के कई अंगों में संक्रमण फैलने लगता है।

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मरीज को समय पर इलाज न मिले तो उसकी मौत हो जाती है। हाड़ौती में तीन दिन में तीन लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, अस्पतालों में 45 रोगी सामने आ चुके हैं। अगस्त माह में ही 28 रोगी मिले है। इनमें से 20 रोगी कोटा के शामिल हैं। स्क्रब टायफस क्या होता है, कैसे फैलती है और इससे बचने के क्या उपाए हैं। जानिए, मेडिकल कॉलेज के सीनियर फिजिशियन डॉ. मनोज सालूजा से...

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क्या होता है स्क्रब टायफस
डॉ. सालूजा बताते हैं, स्क्रब टायफस बैक्टीरिया जनित बीमारी है, जो पिस्सू नामक कीड़े के काटने से होती है। इसे माइट के नाम से जाना जाता है। पिस्सू नामक कीड़े के अंदर बैक्टीरिया होता है। इसके काटने से यह बैक्टीरिया लार के साथ शरीर में प्रवेश करता है, फिर जो बीमारी होती है उसे स्क्रब टायफस कहते हैं। यह बैक्टीरिया इतना खतरनाक होता है कि ऑर्गन फेल्योर का कारण बन जाता है।

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ऐसे फैलता है स्क्रब टायफस
डॉ. सालूजा बताते हैं कि पिस्सू (माइट) काटते ही उसके लार में मौजूद एक खतरनाक जीवाणु रिक्टशिया सुसुगामुशी मनुष्य के रक्त में फैल जाता है। सुसुगामुशी दो शब्दों से मिलकर बना है जिसका अर्थ होता है सुसुगा छोटा व खतरनाक और मुशी मतलब माइट। इसकी वजह से लिवर, दिमाग व फेफड़ों में संक्रमण होने लगते हैं और मरीज मल्टी ऑर्गन फेल्योर की स्टेज तक पहुंच जाता है।

डेंगू की तरह इसमें भी घटती है प्लेटलेट्स
पिस्सूओं के काटने से होने वाले इस रोग में भी डेंगू की तरह प्लेटलेट्स की संख्या घटती है। इससे शरीर के कई अंगों में संक्रमण फैलने लगता है।

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इन्हें ज्यादा खतरा
पहाड़ी इलाके, जंगल और खेतों के आस-पास ये पिस्सू ज्यादा पाए जाते हैं। लेकिन शहरों में भी बारिश के मौसम में जंगली पौधे, बड़ी हुई घास, नदी किनारे, पिकनीक स्थल, खेल मैदान के पास पिस्सू के काटने का खतरा अधिक रहता है। डॉ. सालूजा कहते हैं संभवत: नदी के सहारे ही यह पिस्सू पहाड़ी इलाकों से निकल कर मैदानी इलाकों तक पहुंचा है।

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ऐसे पहचाने लक्षण
डॉ. सालूजा के अनुसार पिस्सू के काटने के करीब दो हफ्ते के अंदर मरीज को तेज बुखार, सिरदर्द, खांसी, मांसपेशियों में दर्द व शरीर में कमजोरी आने लगती है। पिस्सू के काटने वाली जगह पर फफोलेनुमा काली पपड़ी जैसा निशान दिखता है। इसका समय रहते इलाज न हो तो रोग गंभीर होकर निमोनिया का रूप ले सकता है। लिवर व किडनी ठीक से काम नहीं कर पाने से मरीज बेहोशी की हालत में चला जाता है। रोग की गंभीरता के अनुरूप प्लेटलेट्स की संख्या भी कम होने लगती है।

ये रखें सावधानी
माइट घास-फूस व झाडिय़ों में पाया जाता है। नंगे पैर घास में नहीं चलें। नदी व झाडिय़ों में मौजे व जूते पहनकर जाएं। घरों के आसपास भी यदि घास व झाडिय़ां बढ़ी हैं तो उनकी कटाई की जाए।