
विभिन्न जीवन रक्षक दवाओं में काम आता है सांप का जहर
कोटा. सांप का जहर मौत ही नहीं जिंदगी भी दे सकता है। सुनकर थोड़ा अजीब लग रहा होगा लेकिन यह हकीकत है। देश में कुछ जगहों पर सांप के जहर से जीवन रक्षक दवाइयां बनाई जा रही है जो सर्प दंश से पीडि़तों की जान बचाने में रामबाण है। इन दवाओं का असर इतना अचूक हैं कि दुनिया का कितना ही जहरीला सांप हो उसके जहर का असर नहीं होगा।
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भालू, पैंथर, चीतल व अन्य वन्यजीवों के साथ हाड़ौती क्षेत्र विभिन्न प्रजातियों के सर्पों से भी आबाद है। घर बस्तियों में आए दिन सर्प निकलते हैं और सर्प दंश के रोगी अस्पतालों में पहुंचते हैं। सर्पों की प्रजातियां व सर्प दंश से पीडि़तों की खासी संख्या होने के बावजूद सर्पों के विष को संग्रहित करने की कोई योजना नहीं है। हाड़ौती में विष को संग्रहित करने के लिए प्रयोगशाला स्थापित हो तो सर्पों की उपयोगिता आमजन को इनके संरक्षण के प्रति जागरूक कर सकती है। लेकिन, अब तक इस दिशा में न तो मेडिकल विभाग ने पहल की, न ही वन विभाग ने कोई योजना तैयार की है। कई जीवन रक्षक दवाओं में सांपों का विष काम आता है।
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33 से 38 डिग्री तापमान होने के साथ ही सर्पों का निकलना शुरू हो जाता है। नवम्बर के मध्य तक यह स्थिति रहती है कि हर दिन किसी न किसी घर में सर्प घुस जाते हैं। स्नेक केचर्स को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। स्नेक केचर्स के आंकड़ों के मुताबिक बारिश में हर दिन 10 से 12 कॉल आती है। एमबीएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ. नवीन सक्सेना बताते हैं कि बरसात में सप्ताह में तीन से चार सर्पदंश पीडि़त अस्पताल पहुंचते हैं। एक निजी संस्थान के निदेशक विनीत महोबिया के अनुसार अप्रेल से अब तक डेढ़ दर्जन से अधिक पीडि़त संस्थान में पहुंचे हैं।
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हाड़ौती में है भरमार
हाड़ौती क्षेत्र में विषैले व विषहीन दोनों ही तरह के सर्प पाए जाते हैं। सर्पों के जानकार विष्णु शृंगी के अनुसार इंडियन कोबरा, इंडियन क्रेट, रसेल, वाइपर, करैत, सॉ.स्केल्ड वाइपर समेत कुछ प्रजातियोंं के सर्प विषैले हैं। इनके अलावा कॉमन वर्म स्नेक, इंडियन रॉक पाइथन, कॉमन सैंड बोआए, एरिक्स जोहनी, कॉमन वुल्फ, बांडेड कूकरी, धारीदार कीलबैक, ग्रीन कीलबैक, चेक नुमा कीलबैक, ट्रिंकेट स्नेक, एरैट स्नेक, धामण विषहीन सर्पों की प्रजातियां हैं।
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20 से 25 दिन में भर जाती है विष ग्रन्थी
जानकारों के अनुसार सर्पों में विष ग्रन्थी 20 से 25 दिन में भर जाती है। सर्प की आयु व लम्बाई समेत अन्य बिंदुओं पर डिपेंड करता है कि इन दिनों में कितना विष ग्रन्थियों में भर जाता है। आमतौर पर देखा गया है कि सर्प काटने पर अलग अलग मात्रा में विष छोड़ते हैं। जनकल्याण के लिए विष संग्रहण की योजना बनाई जानी चाहिए।
किया गया है कार्य
प्रो. विनोद महोबिया सर्प एवं मानव कल्याण संस्थान के निदेशक विनीत महोबिया बताते हैं कि डॉ. विनोद महोबिया ने सर्पों के संरक्षण को लेकर लोगों को जागरूक करने की दिशा में काफी काम किया था। विष संग्रहण के लिए लैब की स्थापना हो तो सरकार की आमदनी के साथ जीवनरक्षा में भी उपयोगी साबित हो सकती है।
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बहुत उपयोगी है विष
सर्प का विष कई उपयोगी दवाओं के निर्माण में काम आता है। यहां तक कि सर्प दंश से पीडि़तों के इलाज के लिए उपयोगी इंजेक्शन को भी वैज्ञानिक तरीकों से सर्प के विष से तैयार किया जाता है। इस तरह से यह एक जीवन रक्षक का कार्य करता है। मेरी जानकारी में प्रदेश में कहीं सर्पों का विष संग्रहण की कोई लैब नहीं है।
डॉ अखिलेश पांड्ये, वन्यजीव विभाग, कोटा
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अन्य जीवों की तरह ही विभाग सर्पों का संरक्षण भी कर रहा है। क्षेत्र में सर्प काटने के मामले आते हैं। विभाग की फिलहाल विष संग्रहण सम्बन्धित कोई योजना नहीं है। विषय सामने आया है तो इसका प्रस्ताव बनाने पर विचार करेंगे।
आनंद मोहन, मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव एवं फील्ड डायरेक्टर, मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व