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PICS: बैसाखी के मौके पर जानिए कोटा के गुरुद्वारो के बारे में ,क्या है इनकी विशेषता

बैसाखी पर्व शनिवार को शहरभर में हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है | । इस मौके पर शहर के विभिन्न गुरुद्वारों में विशेष आयोजन हों रहे है ।
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कोटा

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Shailendra Tiwari

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Updated: 14 Apr 2018, 4:14 PM IST

kota  Gurudwara

बूंदी रोड स्थित गुरुद्वारा अगमगढ़ साहिब की ख्याति दूर तक हैं। स्थापना की कहानी सेवा भाव से जुड़ी है। गुरुद्वारा अगमगढ़ साहिब की ओर से सुखविंदर सिंह ने बताया कि एक बार बाबा तारा सिंह पंजाब से नांदेड़ साहिब जा रहे थे, वे इस मार्ग से गुजरे तो उन्हें लगा कि यहां ठहरने के लिए कोई स्थान नहीं है। इस पर 1980 में उन्होंने यहां गुरुद्वारा साहिब की नींव रखी, संचालन बाबा लक्खा सिंह को सौंपा। तब से यह गुरुद्वारा शहर के लोगों की आस्था का प्रमुख केन्द्र है। गुरुद्वारा इतना खूबसूरत है कि दूर से ही लोगों को आकर्षित करता है। सभी धर्म के लोगों को आसरा है, 24 घंटे अटूट लंगर। 15 से 20 बीघा में फैले इस गुरुद्वारे में बैसाखी पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इसके अलावा बाबा तारा सिंह की बरसी पर भी आयोजन होते हैं।

kota  Gurudwara

आरकेपुरम गुरुद्वारे के एक ओर बालाजी का मंदिर तो दूसरी ओर मुनि सुव्रतनाथ विराजित। सेवादार मनिंदर सिंह बताते हैं कि 14 वर्ष पुराने गुरुद्वारे की बाबा लक्खा सिंह ने नींव रखवाई। क्षेत्र के करनेल सिंह की भी इसमें भूमिका रही। यहां गुरुग्रन्थ साहिब का प्रकाशोत्सव हर्षोल्लास से मनाया जाता है। हर रविवार लंगर का आयोजन होता है। अब गुरुद्वारे ने भव्य रूप ले लिया।

kota  Gurudwara

सचिव हरमीत सिंह बताते हैं कि 1974 में दादाबाड़ी स्थित गुरुद्वारा साहिब की स्थापना की गई। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए गुरुद्वारा साहिब में लिफ्ट लगवाई गई है। संभवतया शहर का पहला गुरुद्वारा है, जहां लिफ्ट लगी है। गुरुद्वारा साहिब में गुरु अर्जुन देव साहब का शहीदी पर्व श्रद्धा से मनाया जाता है। रक्तदान शिविर व अन्य आयोजन होते रहते हैं।

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यह गुरुद्वारा 40 वर्ष पुराना है। प्रधान जनरेल सिंह बताते हैं कि गुरुद्वारे की स्थापना में भी आम लोगों का सहयोग रहा। गुरुद्वारा साहिब में सभी पर्व मनाए जाते हैं। गुरता गद्दी पर्व विशेष रूप से मनाया जाता है। सुबह शाम कीर्तन की धुन गूंजती है। विज्ञान नगर के अलावा तलवंडी, अनंतपुरा, बोरखेड़ा समेत विभिन्न जगहों से लोग यहां मत्था टेकने आते हैं।

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स्टेशन क्षेत्र स्थित गुरुद्वारा साहिब आजादी से पहले का है। सचिव गुरप्रीत सिंह बताते हैं कि नींव 1943 में रखी गई। 1958 में पंजीकरण कराया गया। तरुमीत सिंह बेदी बताते हैं कि गुरुद्वारे के लिए वरयाम सिंह होरा ने जमीन दी थी। गुरुद्वारे के पहले प्रधान करतार सिंह बेदी थे। गुरप्रीत सिंह के अनुसार यहां बैसाखी व गुरुनानक जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है।

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गुरुद्वारा अगमगढ़ साहिब में वैशाखी पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया इस मौके पर से शाम से दोपहर तक शब्द कीर्तन हुए।इनमे श्रद्धलुओं की भीड़ उमड़ी। कोटा व अन्य स्थानों से आये जत्थो ने शब्द कीर्तन हुए। गुरु का अटूट लंगर भी बरता गया।