
कोटा. चंबल नदी ( Chambal River ) में बही महिला का शव पांचवे दिन गुरुवार को मिल गया है। ( woman dead Body Found ) बृजविलास भवन के पास नदी में बने टापू पर झाडिय़ों में फंसा हुआ था। गोताखोरों की टीम लगातार तलाशी में जुटी हुई थी। दो दिन पहले ही बेटे रेयांश का शव बूंदी जिले के केशवरायपाटन घाट के पास मिला था। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को एमबीएस अस्पताल ( MBS Hospital ) मोर्चरी में रखवाया। जहां मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया।
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गौरतलब है कि गौरतलब है कि कुन्हाड़ी से बाइक पर पत्नी और बेटे को जयपुर की बस में बैठाने की जल्दी में चंबल की छोटी पुलिया से नयापुरा बस स्टैण्ड जा रहे राकेश माखीजा की बाइक तेज बहाव में नदी में फिसल गई। उसकी पत्नी व बेटा तेज बहाव में बह गए, ( Mother-son drowned in Chambal River ) जबकि वह जैसे-तैसे अपनी जा बचा सका। मां-बेटे की शुक्रवार को दूसरे दिन भी तलाश की गई, लेकिन शाम तक दोनों का कोई सुराग नहीं लग सका था।
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परिजनों ने बताया कि कुन्हाड़ी थानाक्षेत्र के कमला उद्यान निवासी राकेश माखीजा गुरुवार सुबह पत्नी साक्षी (26) व बेटे रेयांस (7) को बाइक से नयापुरा बस स्टैण्ड छोडऩे जा रहा था। वहां पर राकेश के ससुराल पक्ष के लोग जयपुर जाने के लिए मां-बेटे का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान ससुराल पक्ष के लोगों ने राकेश से जल्दी पहुंचने को लिए फोन किया। इस पर राकेश ने छोटी पुलिया से जाने का निर्णय लिया। जब वह पुलिया के बीच पहुंचा, तो कोटा बैराज के गेट खुलने से आए पानी के तेज बहाव में वह हड़बड़ा गया और उसकी बाइक फिसलकर गिर गई। वह संभल पाता, उसकी पत्नी व बेटा तेज बहाव में बह गए। आसपास के लोगों ने राकेश को बचाया। घटना की जानकारी लगने पर पुलिस ने नगर निगम की रेस्क्यू टीम को बुलाकर मां-बेटे की तलाश शुरू की, लेकिन दोनों का दूसरे दिन शुक्रवार शाम तक भी कोई सुराग नहीं लग सका।
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सवाईमाधोपुर तक तलाशा था
कुन्हाड़ी थानाधिकारी गंगासहाय शर्मा ने बताया कि मां-बेटे की तलाश के लिए कोटा के अलावा, केशोरायापाटन, इन्द्रगढ़, सवाईमाधोपुर तक तलाश की गई। तीन दिन बाद शनिवार को बेटे का शव केशवरायपाटन में चंबल घाट में मिल गया। मां की तलाश जारी है।
बहाव से बचाव कार्य में परेशानी
कोटा बैराज से छोड़े जा रहे पानी के कारण नदी में काफी तेज बहाव है। ऐसे में निगम की टीम को तलाशी अभियान में परेशानी हो रही है। शुक्रवार को भी पुलिया पर बहाव कम होने के बाद तलाशी अभियान शुरू किया। शाम तक मां-बेटे की तलाश का अभियान जारी था।
3 घंटे बाद पहुंचा था प्रशासन
परिजन का आरोप है कि बैराज के गेट खोलने से पहले चंबल की छोटी पुलिया पर यातायात को रोका जाना चाहिए था, लेकिन वहां ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी। इतना ही नहीं, सुरक्षा चेतावनी तक की व्यवस्था नहीं थी। पुलिया पर पुलिसकर्मी या होमगार्ड का जवान भी तैनात नहीं था और न ही कोई बेरिकेट्स ही थे। पुलिया पर बरसात में बचाव के लिए दोनों और लगाई जाने वाली रस्सियां भी नहीं थी।