
दिनेश राठौर
राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थित अयाना क्षेत्र के ग्रामीणों का रोज का सफर कुछ अजीब सा है, क्योंकि उन्हें अपनी रोजमर्रा की यात्रा के लिए एक लोहे की सीढ़ी का सहारा लेना पड़ता हैं। यह सीढ़ी पार्वती नदी के ऊपर रखी गई है, जो दोनों राज्यों के बीच प्राकृतिक सीमा बनाती है। अगर पहली बार सुना जाए, तो यह सुनने में बहुत अजीब लगेगा कि लोहे की सीढ़ी, जो दो राज्यों को जोड़ने का काम करती है। लेकिन यह सच है और यही वह मार्ग है जिस पर रोज सैकड़ों लोग अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए निर्भर हैं।
पार्वती नदी के किनारे बसे अयाना क्षेत्र के गांवों के लोग प्रतिदिन इस 30 फीट लंबी लोहे की सीढ़ी से नदी पार करते हैं। नदी के बीच में कोई पुलिया नहीं है, जिससे क्षेत्र के लोगों का आना-जाना काफ़ी मुश्किल हो गया था। लेकिन यहां के निवासियों ने अपनी राह को आसान बनाने के लिए खुद ही एक हल खोज लिया। यह सीढ़ी बरसात में हटा दी जाती है, जब नदी का जलस्तर बढ़ जाता है और बाकी आठ महीने तक यह नदी पार करने का एकमात्र साधन बनी रहती है।
यहां के लोग वर्षों से पुलिया बनाने की मांग कर रहे हैं, ताकि उनका जीवन और भी सुलभ हो सके। पहले, राज्य सरकार ने सबमर्सिबल पुलिया बनाने का ऐलान किया था और प्रस्ताव भी भेजे थे, लेकिन सरकार बदलने के बाद इस पर कोई काम नहीं हो सका। लोग अब भी इंतजार कर रहे हैं कि एक दिन उनकी मेहनत रंग लाएगी और इस सीढ़ी के स्थान पर एक स्थायी पुलिया बनेगी।
करीब चार दशक पहले, एक नाव पलटने से लगभग 27 लोगों की जानें चली गई थी। इस दुखद हादसे ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी और नावों के चलने पर प्रतिबंध लगा दिया। तब से लोग 30 से 40 किमी का अतिरिक्त चक्कर लगाने लगे थे। यह स्थिति लंबे समय तक रही, तब जाकर ग्रामीणों ने खुद अपनी ओर से एक समाधान निकाला और इस संकरी पार्वती नदी के बीच लोहे की सीढ़ी का निर्माण किया। यह सीढ़ी अब गांवों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण साधन बन चुकी है।
पार्वती नदी के बीच में एक पानी का झरना और जिन्द महाराज का धार्मिक स्थल स्थित है, जो इस क्षेत्र को और भी अधिक ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्व प्रदान करता है। सर्दियों में यहां पर्यटकों का जमावड़ा रहता है, जो इस खूबसूरत क्षेत्र के मनोरम दृश्य का आनंद लेने के लिए आते हैं। नदी के तट पर गोठों और पार्टियों का आयोजन भी होता है, जिससे इस क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर और परंपराएं और भी जीवंत हो जाती है।
Updated on:
13 Nov 2024, 5:25 PM IST
Published on:
13 Nov 2024, 5:25 PM IST
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