बेटे की आत्मा लेने 2 साल बाद एमबीएस पहुंचे परिजन, तांत्रिकों ने किया अनुष्ठान, टोना-टोटके से अस्पताल में मचा हड़कम्प

Kota News, Kota Crime News, ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के जहन में अंधविश्वास इस कदर बस गया है कि अब तो उन्हें पक्का यकीन हो गया कि कोटा के अस्पतालों में आत्माओं का बसेरा है।

By: ​Zuber Khan

Published: 01 Jul 2019, 02:25 PM IST

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कोटा. ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के जहन में अंधविश्वास ( Superstition ) इस कदर बस गया है कि अब तो उन्हें पक्का यकीन हो गया कि कोटा के अस्पतालों में आत्माओं ( spirit ) का बसेरा है। भोपा और तांत्रिकों को साथ लेकर अस्पताल की चौखट पर दस्तक देते है, फिर शुरू होता है मृतक की आत्मा को वापस बुलाने का काला खेल। (Pooja worship ) ऐसे नजारे आए दिन एमबीएस, ( MBS Hospital ) जेकेलोन ( JK Lone Hospital ) और मेडिकल कॉलेज अस्पताल (Medical college Hospital ) में देखने को मिल रहे हैं।

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विज्ञान ( science ) के युग में लोग अंधविश्वास के अंधेरे से बाहर नहीं निकल पा रहे। अब भी उन्हें ऐसा लगता है कि तंत्र-मंत्र ( Tantra-Mantra ) की मदद से अपनों की आत्मा को वापस बुलाया जा सकता है। लेकिन, हर बार उनकी कोशिशें नाकाम रहती है और बिना आत्मा ( spirit ) लिए ही घरों को लौट जाते हैं। फिर, भी अंधविश्वास के अंधेरे को चीर सत्य के उजाले की ओर कदम नहीं बढ़ाते। ऐसा ही नजारा सोमवार को एमबीएस अस्पताल में देखने को मिला।

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ग्रामीण तांत्रिकों के साथ अस्पताल पहुंचे और परिसर में पूूजा अर्चना शुरू कर दी। इसी के साथ आत्मा को वापस बुलाने का अनुष्ठान शुरू हो गया।
करीब एक घंटे तक अस्पताल परिसर में अंधविश्वास का खेल चलता रहा। जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। लेकिन किसी भी पुलिसकर्मी ने उन्हें यहां से हटाने की जहमत नहीं उठाई।

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दरअसल बूंदी के हिंडोली कस्बा के चेता गांव निवासी एक वर्षीय बालक की दो साल पहले अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। बालक की मौत के बाद परिवार के सदस्यों की तबीयत खराब रहने लगी। घर में अशांति होने पर परिजनों ने भोपे (देवता)की शरण ली। भोपे ने मृतक की आत्मा अस्पताल में भटकने की बात बताते हुए अस्पताल से आत्मा लाने की सलाह दी। इसी के चलते करीब दो दर्जन महिला-पुरूष मृतक की आत्मा लेने एमबीएस अस्पताल पहुंचे।

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अस्पताल के पुराने आउटडोर के पास परिजनों ने बाकायदा पूजा अर्चना की। इस दौरान पुलिसकर्मी व अस्पताल के सुरक्षा गार्ड भी मौके पर पहुचे। उन्होंने परिजनों की समझाइश कर अस्पताल के अंदर जाने से रोका। इधर, महिलाएं बच्चे की आत्मा की शांति के लिए गीत गाती रही। करीब आधे घण्टे तक परिजन अंधविस्वास के फेर में उलझे रहे। बाद में मृतक की आत्मा लेकर चले गए। आपको बता दे विज्ञान के इस युग मे आज भी इंसान अंधविश्वास के आडम्बरों में उलझा हुआ है। खासकर हाडौती सम्भाग में आज भी अंधविश्वासों का नजारा देखने को मिलता। लोग कोटा के अस्पतालों में मृतक की आत्माओं को लेने आते है। अधिकतर आत्मा को लेने आने वाले लोग बूंदी जिसे से ही आते हैं।

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