रामगंजमंडी (कोटा). कोटा स्टोन पत्थर से वसूली जाने वाली रायल्टी का ठेका शुक्रवार आधी रात से खनिज विभाग ने संभाल लिया। पहले रायल्टी संग्रहण कार्य संवेदक संभालता था, लेकिन उसकी तीन माह की अवधि शुक्रवार को पूरी हो गई।
कोटा स्टोन का खनन रामगंजमंडी के अलावा झालावाड जिले में होता है। दोनों जगह रायल्टी संग्रहण का ठेका अलग-अलग था, लेकिन वर्ष 2023-24 के लिए खनिज विभाग ने रामगंजमंडी, झालवाड की लाइम स्टोन खदान से निकलने वाले पत्थर पर लगने वाली रायल्टी का ठेका सयुंक्त कर दिया है। जिसकी ऑनलाइन नीलामी 26 जून तय की थी, लेकिन किसी संवेदक ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। झालावाड व रामगंजमंडी की सयुंक्त नीलामी 97 करोड़ तय की गई है। रामगंजमंडी का पहले अलग सी ठेका था जिसकी नीलामी पचास करोड़ थी जिस संवेदक के नाम यह खुली थी, उससे दस प्रतिशत राशि बढ़ाकर तीन माह के लिए उसे सौंपा गया था। कुछ इस तरह से झालवाड जिले में कार्य हुआ, लेकिन दोनों संवेदक को इस बार रायल्टी संग्रहण कार्य में घाटा होने से दोनों ने विभाग की निकाली निविदा में भाग नहीं लिया, जिसके कारण एक जुलाई से रायल्टी संग्रहण कार्य अब विभाग को संभालना पड़ जाएगा।
अगस्त माह के अंतिम दिनों में होगा उत्पादन शुरू
झालावाड व रामगंजमंडी की लाइम स्टोन खदानों में नया उत्पादन प्रति वर्ष बरसात बाद अगस्त माह के अंतिम दिनों में चालू होता है जो जून माह तक चलता है। बरसात में सिर्फ चेचट क्षेत्र की खदानों में उत्पादन कार्य चलता है, जबकि अन्य जगह खदान में पानी भरने से कार्य बंद हो जाता है। इस अवधि में पत्थर स्टाकों में जमा पत्थर की बिक्री होती है लेकिन यह भी तब संभव होता है जब मिट्टी के इन स्टाकों में बरसाती पानी सूख जाता है।
सितंबर तक ठेका होने की उम्मीद
बरसात में खदान में कामकाज नहीं चलने से रायल्टी संग्रहण का ठेका सितंबर माह की शुरुआत तक होने की फिलहाल कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। सितंबर माह में हालांकि खदान से पत्थर का उत्पादन चालू हो जाता है लेकिन पत्थर कटाई कार्य में ज्यादा तेजी नहीं आती, इस कारण रायल्टी संग्रहण कार्य की निविदा में कोई संवेदक भी हाथ नहीं डालेगा। ऐसे में खनिज विभाग को ही सितंबर माह तक रायल्टी संग्रहण कार्य करना पड़ेगा।