
OMG: कोटा में हर रात खतरे में 12 लाख लोगों की जान, अफसरों ने दिखाया मौत को शहर का रास्ता
कोटा. नगर निगम में अधिकारियों और बोर्ड के बीच चल रही खींचतान का असर जनता से जुड़े कामकाज पर भी पडऩे लगा है। लोगों की निगम में कोई सुनवाई नहीं हो रही। इस कारण पार्षदों से लेकर अधिकारियों के चक्कर लगाने को विवश हैं। लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद भी निगम का काम अभी पटरी पर नहीं आया है। स्थिति यह है कि शहर के मार्गों पर रोशनी के लिए लगाई गई करीब तीन हजार रोड लाइटें खराब पड़ी हैं, इन्हें दुरुस्त करने से कम्पनी ने मना कर दिया है।
अंधेरी राहों के कारण हमेशा दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। कोटा में 65 वार्ड हैं और 12 लाख की आबादी है। रातभर सड़कों पर वाहनों का आवागमन रहता है। रोड लाइटें बंद होने से सड़कों पर अंधेरा पसरा है। सड़कों पर अवारा मवेशी भी बैठे रहते हैं जो अंधेरे के कारण दिखाई नहीं देते। ऐसे में इनसे टकराने से जान का खतरा बना रहता है। वहीं, गड्ढों व सामने से आते वाहन दिखाई नहीं देने से वाहन सवारों व राहगीरों को दुर्घटना का खतरा लगा रहता है।
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भाजपा शासन में स्वायत्त शासन विभाग और भारत सरकार के उपक्रम एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) के बीच शहर में रोड लाइटें लगाने का अनुबंध हुआ था। इसके तहत मरम्मत का काम भी कम्पनी को ही करना था। सार्वजनिक रोशनी के लिए शहर में चालीस हजार से अधिक एलईडी लाइटें लगाई जा चुकी हैं, लेकिन एक बार खराब होने के बाद इन लाइटों को दुरुस्त करने में कम्पनी के प्रतिनिधि रुचि नहीं रहे। शहर के 65 वार्डों के अलग-अलग क्षेत्रों में तीन हजार से अधिक रोड लाइटें खराब हैं। पार्षदों का कहना है कि रोड लाइटें खराब होने पर वार्ड के लोग उन्हें शिकायत करते हैं और वे इस संबंध में निगम में शिकायत करते हैं तो कोई सुनवाई नहीं हो रही। इस बारे में आयुक्त को भी शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अभी तक समस्या जस की तस है।
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विवाद के कारण नहीं हो रही दुरुस्त
निगम का खराब एलईडी को ठीक करने या बदलने का अनुबंध ईईएसएल से हुआ है, जबकि रोड लाइटों की मरम्मत का काम अन्य ठेका फर्म को दे रखा है। दोनों एजेन्सियों में इसको लेकर ही विवाद है। ईईएसएल कम्पनी का कहना है कि मैंटेनेंस का काम अन्य फर्म को दे रखा है तो वही दुरुस्त करे, जबकि ठेका फर्म का कहना है कि रोड लाइट का यदि तार खराब है, लाइन में फाल्ट आ गया है तो वह ठीक करेंगे, लेकिन एलईडी खराब है तो उसे वह ठीक नहीं करेंगे। इस विवाद के कारण ही शहर की रोड लाइटें खराब पड़ी हैं।
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निगम अधिकारियों की उदासीनता के कारण लोग परेशान हैं। कांग्रेस पार्षद दल की ओर से इस बारे में नगरीय विकास मंत्री को पत्र लिखकर समूचे मामले से अवगत करवाकर कार्रवाई का आग्रह करेंगे।
अनिल सुवालका, प्रतिपक्ष नेता
शहर में सैकड़ों रोड लाइटें खराब पड़ी हैं, अधिकारियों को लिखित में शिकायत दे चुके हैं, कोई सुनवाई नहीं हो रही।
महेश गौतम, लल्ली पार्षद
रोड लाइटें ठीक नहीं करने पर कम्पनी के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा गया है। अंधेरे के कारण कई बार दुर्घटनाएं हो जाती हैं। आचार संहिता खत्म होने के बाद कम्पनी को ब्लैक लिस्टेड करने का समिति की बैठक में निर्णय लेंगे।
नरेन्द्र हाड़ा, अध्यक्ष विद्युत समिति
पार्षद रोज रोडलाइटें खराब होने सहित अन्य समस्याएं लेकर आते हैं, लेकिन अधिकारी हर काम में आचार संहिता का बहाना बना लेते हैं। आचार संहिता खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं।
सुनीता व्यास, उप महापौर
कम्पनी ने नोटिस का जवाब भेजकर रोड लाइटें ठीक करने की सहमति दे दी है। कंपनी कहा था कि उनके पास उपकरण नहीं थे, इसलिए लाइट ठीक करने में परेशानी हो रही थी। कंपनी को खराब लाइटों की सूची सौंपकर दुरुस्त करने के लिए पाबंद करेंगे। शहर में करीब 3 फीसदी रोडलाइटें खराब हैं।
राकेश शर्मा, अधीक्षण अभियंता विद्युत निगम
Updated on:
11 May 2019 02:04 pm
Published on:
11 May 2019 02:04 pm
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