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Topper’s Speak: बाड़मेर के ‘प्रिंस’ से जाने सफलता का मंत्र

जब तक रोज की पढ़ाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक मैं सोता नहीं था। कोचिंग टाइम के अलावा कम से कम छह घंटे रोजाना सेल्फ स्टडी करता था।
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Topper's Speak: बाड़मेर के 'प्रिंस' से जाने सफलता का मंत्र

नाम : प्रिंस चौधरी
नीट : रैंक - 5 स्कोर - 686
पिता : रामाराम चौधरी, मेडिकल स्टोर संचालक
माता : कमलादेवी, गृहिणी
नीट में 686 अंक प्राप्त कर अखिल भारतीय स्तर पर 5वीं रैंक प्राप्त करने वाला एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के क्लासरूम कोचिंग के छात्र प्रिंस चौधरी राजस्थान के बाडमेर जिले के छोटे से गांव धौरीमन्ना से है और नियमित पढ़ाई को ही सफलता का सूत्र मानता है। प्रिंस ने बताया कि जो एलन में पढ़ाया जाता था, उसका नियमित रूप से रिवीजन करता था। जब तक रोज की पढ़ाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक मैं सोता नहीं था। कोचिंग टाइम के अलावा कम से कम छह घंटे रोजाना सेल्फ स्टडी करता था। बाड़मेर के धोरीमन्ना में ही प्रारंभिक पढ़ाई हुई। यहां 10वीं तक हिन्दी मीडियम से पढ़ाई की, इसके बाद 11वीं व 12वीं में मीडियम इंग्लिश लेते हुए पढ़ाई की। दसवीं में 94.17 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, वहीं 12वीं में 93.6 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। दसवीं में अच्छे अंक प्राप्त होने के साथ ही पिताजी ने कोटा से कोचिंग करवाने का मन बना लिया था। अभी एम्स के रिजल्ट का भी इंतजार है, एम्स दिल्ली से एमबीबीएस करना चाहता हूं। आगे किस स्पेशलिटी में जाना है इस बारे में अभी कुछ नहीं सोचा। पिता रामाराम चौधरी धौरीमन्ना में ही मेडिकल स्टोर संचालित करते हैं, मां कमलादेवी गृहिणी हैं। परिवार में छोटी बहन सिमरन भी है जो कक्षा 8वीं में है। पढ़ाई के साथ-साथ कॉमिक्स पढ़ने का शौक है, जब कोटा आया तो कॉमिक्स साथ लाया था। अभी भी समय मिलने पर पढ़ता हूं। इसके अलावा टीवी पर कार्टून देखता हूं। हिन्दी फिल्मों के गाने सुनना पसंद है। सोशल मीडिया में रूचि नहीं है।

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कोटा में यहां पढ़ने का मन करता है
प्रिंस ने बताया कि जब पापा ने कोटा भेजा तो थोड़ा अटपटा लगा था लेकिन यहां आकर देखा कि पढ़ाई के लिए इससे अच्छी जगह कोई नहीं हो सकती। एलन में एडमिशन लेने के बाद पढ़ाई करने का इतना मन किया कि मजा आता था। यहां नेशनल लेवल का कम्पीटिशन मिलता है, जिससे हम एक दूसरे से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा करते हुए आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं, इसके लिए पढ़ते हैं।