अंधविश्वास के जख्म: वो शराब पीते रहे और 9 दिन यातनाएं सहती रही मासूम, पढि़ए, बच्चों पर हुए सितम की खौफनाक दास्तां...

अंधविश्वास के जख्म: वो शराब पीते रहे और 9 दिन यातनाएं सहती रही मासूम, पढि़ए, बच्चों पर हुए सितम की खौफनाक दास्तां...

Zuber Khan | Publish: Jun, 16 2019 02:10:52 PM (IST) Kota, Kota, Rajasthan, India

तकनीक और सूचना क्रांति के दौर में भले ही अंतरिक्ष और चांद पर घर बसाने की तैयारी चल रही हो, लेकिन अंधविश्वास अभी भी हमारा पीछा नहीं छोड़ रहा।

बूंदी. तकनीक और सूचना क्रांति के दौर में भले ही अंतरिक्ष और चांद पर घर बसाने की तैयारी चल रही हो, लेकिन अंधविश्वास अभी भी हमारा पीछा नहीं छोड़ रहा। बूंदी जिले में आज भी अंधविश्वास ( Superstition ) मासूमों की जिंदगी से खेल रहा है। गांव-मजरों में तो तांत्रिकों ( Tantrik , tona totka , Tantra-Mantra, tantrik ) का जाल सा बिछा हुआ है। दो बच्चों की तो मौत हो चुकी और कई मासूम बच्चों को यातनाएं सहनी पड़ी।

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अपने कलेजे के टुकड़ों को ऐसे हाल में देख मां का कलेजा मुंह को आ जाता है लेकिन सामाजिक बहिष्कार के डर से चुप रहने में ही बच्चों की भलाई समझती है। जितना दर्द बच्चे सहते हैं उतना ही मां-बाप भी सहते हैं। एक साल में अंधविश्वास के कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसे देख दिल दहल जाता है। बतौर उदाहरण देखें तो जिले के हिण्डोली उपखंड में तो मासूम को नौ दिन तक सामाजिक बहिष्कार झेलना पड़ा था। जिले में ऐसे कई मासूम बच्चे हैं जिन्होंने अंधविश्वास का दंश झेला है। पेश है खास रिपोट...

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मासूम ने झेला 9 दिन तक अंधविश्वास का दंश
हिंडौली में अंधविश्वास के चलते छह वर्षीय मासूम बालिका को जुलाई 2018 में नौ दिन तक सामाजिक बहिष्कार का दंश झेलना पड़ा था। यह मामला हिण्डोली उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत सथूर में स्थित हरिपुरा गांव का था। यहां छह वर्षीय मासूम से विद्यालय जाने के दौरान टिटहरी के अंडे फूट गए थे। पंच-पटेलों की बैठक में मासूम बालिका को समाज से बहिष्कृत करने का फरमान सुना दिया था।

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बालिका के घर के अंदर प्रवेश करने पर रोक लगा दी थी। बालिका को खाना एवं पीने के पानी के लिए भी अलग से बर्तन दिए गए थे। पंच-पटेलों के फरमान के चलते मासूम का बाप उसे लेकर घर के बाहर बने बाड़े में रह रहा था। रात का अंधेरा मासूम को झकझौर देता। जानवरों की आवज से बाप-बेटी का दिल दहल उठता। लेकिन, समाज के ठेकेदारों को दिल नहीं पसीजता। वो खौफनाक 9 दिन जब याद आते हैं तो बाप बेटी की रुह कांप जाती है।

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तब पिता ने पत्रिका टीम को बताया था कि पंच-पटेलों ने शराब की बोतल व चने भी मंगवाते थे। वे शराब पीते रहते और बेटी यातनाएं सहती रहती। बाद में खबर प्रकाशित हुई तो प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और मासूम को घर में प्रवेश कराया था। इसे राज्य मानव अधिकार आयोग ने भी गंभीर माना था। तत्कालीन आयोग अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश टाटिया ने इस मामले में जिला कलक्टर व जिला पुलिस अधीक्षक से 19 जुलाई 2018 तक कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी थी।

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बच्चों ने सही यह यातनाएं

केस -1
जजावर इलाके के सीसोला ग्राम पंचायत के सुवासड़ा गांव में 4 वर्षीय मासूम की मौत हो गई थी। उसे 4 मई को जहरीले कीड़े ने काट लिया था। परिजन उसे चिकित्सक के पास ले जाने के बजाए किसी थानक पर ले गए। झाड़-फूंक करने के दौरान बालक की मौत हो गई।

 

केस-2
15 जून को गर्मियों की छुट्टियों में नानी के यहां आई 9 वर्षीय बालिका से अनजाने में टिटहरी के अंडे फूट गए तो ग्रामीणों ने इस अपशकुन मान चंबल में स्नान करने भेज दिया। जहां उसकी डूबने से मौत हो गई।

 

केस -3
तालेड़ा थाना क्षेत्र के खलूदा गांव निवासी ओमप्रकाश की नौ वर्षीय बेटी कोमल की 15 जून को चम्बल में डूबने से मौत हो गई। कोमल के हाथों से टिटहरी के अंडे फूट गए थे। इसे अपशकुन मानते हुए उसे चम्बल में स्नान करने भेज दिया।


केस -4
हिण्डोली उपखंड क्षेत्र के हरिपुरा गांव में टिटहरी के अंडे फूटने पर जुलाई 2018 को छह वर्षीय मासूम को घर से बाहर रहना पड़ा। बाद में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे, तब उसे घर में प्रवेश मिला। इस घटना की पूरे प्रदेश में निंदा हुई थी।?

 

समझाइश के लिए आगे आएं अधिकारी
अंधविश्वास के मामलों में अगर बात करें तो समझाइश काफी हद तक मददगार साबित हो सकती है। सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी रामप्रसाद ने बताया कि ग्रामीणों के साथ पुलिस अभियान चलाकर समझाइश करें। खासकर बच्चों के मामलों में।

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मन की बात अपने लोगों से शेयर करें
आंखें बंद करके किसी पर विश्वास मत करो। किसी ने कुछ कह दिया और उसे ही करने लग जाए। ऐसा जरूरी नहीं। तथ्यात्मक रूप से देखना चाहिए। वत व परिस्थितियों के अनुसार चीजें काफी कुछ बदल जाती हैं। इंसान को सोच बदलने की जरूरत है। कुछ नियम बनाए थे फायदे के लिए, लेकिन लोग ढोंगी व ढकोसलों के चक्कर में फंसते चले जाते हैं। कोई भी बात होने पर लोगों को मन में नहीं घुटना चाहिए, उसे लोगों से शेयर करें, ताकि लोगों के अनुभव पता चलें और उसे यह पता चले कि जो उसके साथ हुआ है वो औरों के साथ भी हुआ है।
- डॉ. रश्मि गुप्ता, मनोरोग, मानसिक व मस्तिष्क रोग विशेषज्ञ, बूंदी

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बालक भगवान का रूप, इनसे दोस्ताना व्यवहार करें
इस मामले में दोषियों के खिलाफ संबंधित पुलिस थानों में प्रकरण दर्ज होने चाहिए। पुलिस को तत्परता ऐसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। किरोश न्याय अधिनियम (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण), भारतीय दंड संहिता एवं बाल संरक्षण आयोग अधिनियम में यह प्रकरण दर्ज होने चाहिए। इससे ऐसे प्रकरणों पर लगाम लग सके। बालक भगवान का रूप है, उसके साथ दोस्ताना व्यवहार होना चाहिए। मानवीय संवेदना का ह्रास नहीं होना चाहिए। बालक की जान तक चली जाए, इससे बड़ा जघन्य अपराध नहीं हो सकता।
- राजकुमार दाधीच, किशोर न्याय बोर्ड, सदस्य, बूंदी

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