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Dog Day Special: झालावाड़ के डाक-बंगले में दफन है वफादार जिमी की दास्तां, महिला को बचाने पैंथर से भिड़ गया था डॉग

National Dog Day, Faithful dog : ब्रिटिश अधिकारी की पत्नी को बचाने के लिए खूंखार पैंथर से भिड़ गया था वफादार डॉग जिमी।    
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कोटा

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Zuber Khan

•

Aug 26, 2019

National Dog Day

Dog Day Special: झालावाड़ के डाक-बंगले में दफन है वफादार जिमी की दास्तां, महिला को बचाने पैंथर से भिड़ गया था डॉग

कोटा. श्वानों की वफादारी की कई कहानियां और किवदंतियां आपने अक्सर फिल्मों में देखी होंगी, ( National Dog Day ) लेकिन ऐसे ही एक वफादार श्वान की कहानी ( True story jimmy dog ) प्रदेश के झालावाड़ के डाक बंगले में दफन है। ये दास्तां आजादी से पहले की है। साल था 1903, झालावाड़ रियासत होने के कारण अंग्रेज सरकार ( British government ) के प्रतिनिधि के तौर पर ब्रिटिश अधिकारी इसी डाक बंगले में अपनी पत्नी के साथ रहते थे। डाक बंगले की रखवाली के लिए यहां श्वानजिमी को रखा गया था।

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एक दिन ब्रिटिश अधिकारी की पत्नी टहलने के लिए डाक बंगले के बाहर गई। तभी अचानक एक पैंथर ने महिला पर हमला कर दिया। वफादार जिमी महिला को बचाने के लिए खूंखार पैंथर से भिड़ गया। ब्रिटिश अधिकारी की पत्नी तो जैसे-तैसे अपनी जान बचाकर डाक बंगले में पहुंच गई, लेकिन पैंथर के हमले में जिमी की जान चली गई। जिमी की बहादुरी और वफादरी से ब्रिटिश दम्पती इतना प्रभावित हुए की उन्होंने डाक बंगला परिसर में श्वान की समाधि बनवाई। ये समाधि आज भी मौजूद है। समाधि पर जिमी का नाम और घटना का साल इंगित है। इस समाधि को देखने के लिए सैलानी भी यहां आते हैं।

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80 के दशक तक आता था बजट
डाक बंगले में मौजूद कर्मचारी बताते हैं कि आजादी के बाद ब्रिटिश परिवार इंग्लैंड चला गया, लेकिन 80 के दशक तक हर वर्ष लंदन से कुछ राशि इस समाधि की सार संभाल के लिए आती थी। लेकिन सरकार और सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा कोई राशि आवंटित नहीं करने की वजह से आज ये समाधि दुर्गति का शिकार है।

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