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BiG News: हैरान कर देगी श्रीदेवी की इस बेटी के साध्वी बनने की कहानी

चार बरस की आयु में बच्चा रोता है जिद करता है, पर इस माया को क्या हुआ के कंद मूल का त्याग कर दिया, 14 बरस की आयु में ब्रह्मचर्य व्रत लिया।
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कोटा

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Zuber Khan

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Updated: 21 Apr 2018, 1:20 PM IST

Sridevi's daughter Sadhv

कोटा , चार बरस की आयु में बच्चा रोता है जिद करता है, मचलता है, पर इस माया को क्या हुआ के कंद मूल का त्याग कर दिया, बात यहीं पूरी नहीं हुई, 14 बरस की आयु में ब्रह्मचर्य व्रत लिया। जैसे हर दिन कोई न कोई व्रत, कोई न कोई संकल्प।... फिर संतों की वाणी की कृपा कुछ ऐसी बरसी की यह माया 20 बरस की आयु में 'विशुद्धमति' बन गई। कहानी है साध्वी विशुद्धमति की। कोटा में दोबारा चातुर्मास करने के लिए शुक्रवार को ही साध्वी संघ स्टेशन जैन मंदिर पहुंच गई। मंदिर धर्मशाला में साध्वी ने 'पत्रिका' से बातचीत की। प्रस्तुत है जीवन, अध्यात्म व वर्तमान प्रासंगिक विषयों पर उनकी विचार गंगा की झलक।

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दो घंटे भी विश्राम नहीं
संघ में शामिल साध्वी विज्ञमति बताती हैं कि साध्वी काफी सहज हैं। उनके पढ़ाने समझाने का तरीका सहज है। इस उम्र में भी कठोर तप करती हैं और नाममात्र का विश्राम। रात को 9 से 11-11.30 बजे तक ही विश्राम करती हैं, फिर बैठ जाती हैं।

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डाल दिया था चिंता में
छोटी उम्र में ही बेटी के त्याग व फिर माता पिता के सामने ब्रह्मचर्य व्रत लेने की बात से मां श्रीदेवी व पिता गुलजारी लाल चिंतित हो गए। इस पर उन्होंने कीर्ति महाराज से माया के भविष्य के बारे में पूछा। कीर्ति महाराज ने इतना ही कहा कि 'डरो मत, लेने दो असिधारा व्रत।Ó यह नारी नेतृत्व की कमान संभालेंगी। साध्वी विशुद्धमति को दीक्षा लिए 50 वर्ष होने को हैं, इस बीच में वह 45 को दीक्षा दे चुकी हैं। 2008 में कोटा मेंं भी उन्होंने एक साथ 9 दीक्षा दी थी।

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आपकी दीक्षा के वक्त 50 वर्ष पूर्व महिलाओं की स्थिति क्या थी, उन हालात में परिवार के लोगों ने नहीं रोका?
तब वास्तव में परिस्थितियां भिन्न थी, बेटे-बेटियों को अपने से अलग होते किसके माता-पिता नहीं रोकते। लेकिन दृढ़ता जहां होती है सफलता जरूर मिलती है।


दीक्षा क्यों ली?
मैं नहीं जानती क्यों ली, लेकिन यह सब पूर्व जन्मों के कर्म, संस्कार, गुरु व ईश्वर की कृपा से ही संभव।

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बेटियों के प्रति अपराध बढ़ रहे, असुरक्षा का भाव है, क्या कहेंगी ?
हर हाथ में मोबाइल है। मोबाइल में समाज के लिए अच्छा भी है, बुरा भी। गुरुजनों के साथ माता-पिता की जिम्मेदारी भी है कि बच्चों को संस्कार दें।

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आतंकवाद का खात्मा कैसे संभव?
अहिंसा, अपरिग्रह, अनेकांतवाद को अपनाना होगा, भगवान महावीर के सिद्धांतों को, भगवान राम के आदर्शों की पालना करनी होगी।


सीमा विवाद कैसे खत्म हो ?
जहां तेरा-मेरा है, वहां झगड़े। सभी अपनी सीमा में रहें, दूसरे के मामले में हस्तक्षेप करने पर झगड़ा होता है।


कोटा कोचिंग नगरी है, देश भर के विद्यार्थी आते हैं, उनके लिए संदेश?
पढ़ाई लिखाई, विज्ञान के आविष्कार होना चाहिए, लेकिन यह भी समझना होगा कि उपयोग कैसे करें। धर्म व संस्कार के साथ आगे बढऩे से ही शिक्षा सार्थक व जनहितकारी साबित हो सकती है।


सरकार से कोई उम्मीद?
कत्लखाने बंद होने चाहिएं। पशुधन बढेगा, देश के विकास में यह मददगार होगा।

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आपके पिछले चातुर्मास के दौरान समाज को चेतना मिली, बालिकाओं के लिए तलवंडी में हॉस्टल बना, इस बार क्या?
इस बारे में कुछ नहीं कह सकते। ईश्वर जैसा चाहेंगे, वही होगा। जनहित में धर्म का प्रचार-प्रसार करना है।