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संभल कर रहें, सोशल मीडिया आपके जीवन और समाज पर कर रहा है आक्रमण

जीवन व समाज में सबसे ज्यादा बाजारवाद, तकनीकी क्रांति व सोशल मीडिया का आक्रमण हो रहा है।

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कोटा .

जीवन व समाज में सबसे ज्यादा बाजारवाद, तकनीकी क्रांति व सोशल मीडिया का आक्रमण हो रहा है। सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यम सकारात्मक की अपेक्षा नकारात्मक संदेश ज्यादा वायरल कर रहे हैं।
यह बात बुधवार को बसंत विहार स्थित माहेश्वरी भवन में राजकीय महाविद्यालय के व्याख्याता विवेक मिश्र ने कही।मिश्र राजस्थान साहित्य अकादमी की ओर से आयोजित दो दिवसीय अंतर प्रांतीय साहित्यकार सम्मेलन के द्वितीय सत्र में साहित्य में आक्रामकता, दुराग्रह एवं अतिश्योक्ति विषय पर पत्रवाचन कर रहे थे।

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मिश्र ने कहा कि जीवन में रचनात्मक कार्य बहुत जरूरी है, लेकिन रचनात्मक कार्यों में आक्रामकता नहीं होनी चाहिए। साहित्य ऐसा लिखा जाए, जिसे समाज को सीख मिले। समाज सुधार का संदेश मिले। भले ही वह किसी भी मायने में हो। पुराने जमाने की बात करें तो संत कबीर ने जो कुछ लिखा, वह समाज को सुधारने के लिए लिखा। रुढ़ीवादिता का विरोध किया।

संचालन करते हुए कमलेश चौधरी ने कहा कि कुछ लोग साहित्य का पूरा भाव जाने बिना ही आलोचना करने लग जाते हैं। वहीं अतिश्योक्ति पर उन्होंने कहा कि साहित्यकार का यह धर्म बनता है कि वह अपने साहित्य सृजन में नायक का अतिश्योक्ति पूर्ण वर्णन करे, लेकिन खलनायक के अतिश्योक्ति पूर्ण वर्णन से बचे।

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मुख्य अतिथि अखिल भारतीय साहित्य परिषद के अध्यक्ष नंदन चतुर्वेदी, विशिष्ट अतिथि अकादमी की सरस्वती सभा के सदस्य डॉ. गौरीकांत, व्यंग्यकार डॉ. अतुल चतुर्वेदी थे। अध्यक्षता उदयपुर की रेणु सुरोलिया ने की।
उद्घाटन सत्र में मौजीबाबा आश्रम की संचालिका हेमा सरस्वती ने आशीर्वचन में कहा कि साहित्य समाज में राष्ट्रीय सरोकार देखना है तो वाल्मीकि, वेदव्यास, तुलसी , कालीदास, रेदास के साहित्य को पढऩा चाहिए। उन्होंने समाज को सकारात्मक संदेश तो दिया है ही। साथ में कुरीतियों, रुढी़वादिता का साहित्य के माध्यम से विरोध भी किया।

वैश्विक क्रान्तियों के पीछे साहित्य
अध्यक्षता करते हुए राजस्थान साहित्य अकादमी के सदस्य अरविंद सोरल ने साहित्य के राष्ट्रीय सामजिक सरोकार पर प्रकाश डाला। पत्रवाचन करते हुए डॉ. कौशल तिवारी ने वैश्विक क्रांतियों की सफलता के पीछे साहित्य की प्रमुख भूमिका को प्रस्तुत किया।

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साथ ही प्राचीनकाल से लेकर वर्तमान तक के साहित्य व साहित्यकारों की समाज विकास में योगदान पर चर्चा की। परिचर्चा में भगवती प्रसाद गौतम, शकूर अनवर, वि_ल पारीक, मीता शर्मा ने विचार रखे। विशिष्ट अतिथि कोटा नागरिक सहकारी बैंक के अध्यक्ष राजेश कृष्ण बिरला ने कोटा शहर में होने वाली साहित्यिक गतिविधियों को सराहा।