दिवाली नजदीक आने तथा गेहूं की बुवाई के लिए खाद-बीज का बंदोबस्त करने के लिए किसान उड़द लेकर आ रहे हैं, लेकिन खरीद बंद होने से परेशान हैं। किसानों का कहना था कि अधिकारी अवकाश से नहीं लौटे तो कैसेे दिवाली मनाएंगे। उड़द की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद नहीं होने से उपज औने-पौने दामों में बेचनी पड़ी रही है। इससे चलते कई किसानों के घरों में बच्चों के हाथ कैसे पीले होंगे, कर्ज कैसे उतरेगा। सुल्तानपुर क्षेत्र के कोटड़ापुरा गांव निवासी चेतन व नरेन्द्र कुमार ने बताया कि उनके खेत में 7 से 8 बीघा जमीन पर उड़द की बुवाई हुई। वह कोटा भामाशाहमंडी में बेचने के लिए आए हैं, लेकिन उनकी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद नहीं हुई। उन्हें मजबूरी में व्यापारियों के यहां कम दाम में फसल बेचनी पड़ी। इससे उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा, जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उनकी उपज 5200 रुपए बिकती, लेकिन 2800 से 3000 रुपए प्रति क्विंटल ही बिकी।