
कोटा. जलदाय विभाग की ओर से चम्बल नदी से अकेलगढ़ वाटर प्लांट में जलशोधन किया जाता है। यहां से पाइप लाइनों के माध्यम से घरों में जलापूर्ति की जाती है। शहर में 400 से 410 एमएलडी (मिलीयन ऑफ लीटर पर डे) सप्लाई किया जा रहा है। कोटा शहर में करीब 12 लाख लोग पानी का उपयोग करते हैं। कुल जलापूर्ति में से 120 एमएलडी पानी का लीकेज होता है। इसमें चार लाख से अधिक लोगों को उनकी जरूरत के मुताबिक पानी मिल सकता है।
पानी की बर्बादी की गणना मुख्य जल स्रोत से लेकर घरों तक जलापूर्ति की गणना के आधार पर की जाती है। इसमें 20 प्रतिशत पानी की बर्बादी पाइप लाइनों में हो रहे लीकेज के कारण होती है। इसके अलावा पाइप लाइन से घर तक के कनेक्शन और अवैध कनेक्शन, सार्वजनिक नलों के चौबीस घण्टे चालू रहने पर बर्बादी मानी जाती है। देश में जलदाय विभाग 15 प्रतिशत तक जल बर्बादी को आदर्श मानता है। कोटा में 32 प्रतिशत की बर्बादी चिंता का कारण है। हालांकि अब स्मार्ट सिटी और अमृत योजना में नई पाइप लाइनें बिछाने और मीटर बदलने का प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है।
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इस तरह तय होता है किसको कितना मिलता है पानी
निर्धारित मापदंडों के अनुसार गांव व छोटे कस्बों में प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 40 लीटर पानी की आवश्यकता मानी गई है, वहीं एक लाख तक की आबादी वाले स्थानों पर रहने वाले लोगों की आवश्यकता 70 व शहरों में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 135 लीटर पानी की आवश्यकता मानी गई है। इस तरह से शहर में व्यर्थ बहने वाला एक लाख लीटर पानी से 2500 की आबादी वाले छोटे गांवों के वाशिंदों को पानी उपलब्ध करवाया जा सकता है।
प्रतिदिन 400 एमएलडी जलापूर्ति
इधर जलदाय विभाग के अनुसार शहर में अकेलगढ़ व मिनी अकेलगढ़ दो जलशोधन केन्द्रों से जलापूर्ति की जा रही है। 400 से 410 एमएलडी जलापूर्ति रोज की जा रही है। शहर भर में विभाग के करीब डेढ़ लाख कनेक्शन हैं। शहर में विभागीय मापदंडों के अनुसार 135 लीटर पानी प्रति व्यक्ति प्रति दिन के हिसाब से दिया जाना चाहिए, लेकिन यहां 200 लीटर पानी प्रति व्यक्ति प्रति दिन के हिसाब से वितरित किया जा रहा है।