
कार्रवाई करती पुलिस और फूट-फूटकर रोती पुलिस की फोटो: पत्रिका
Illegal Encroachment Removed In Sangod Kota: कोटा जिले के सांगोद के अंता रोड स्थित सड़क किनारे बसी बरसों पुरानी बस्ती पर बुधवार को प्रशासन के बुलडोजर चले। कार्रवाई के दौरान सरकारी जमीन पर बने 30 से अधिक कच्चे-पक्के मकानों को प्रशासन ने तोड़ दिया। सुबह से शुरू हुई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शाम तक जारी रही। पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी समेत सैकड़ों पुलिसकर्मी व नगर पालिका कार्मिक मौके पर डटे रहे।
उल्लेखनीय है कि यहां अंता रोड पर उपकारागृह से सटी सिंचाई विभाग की भूमि पर बरसों से लोग कच्चे-पक्के मकान बनाकर रह रहे थे। कुछ साल पूर्व यहां मिनी सचिवालय का निर्माण हुआ तो यह भूमि मिनी सचिवालय के नाम हो गई। उस समय भी यहां अतिक्रमण हटाने की कार्ययोजना बनी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
अदालत चौराहा से पुलिस उपअधीक्षक कार्यालय तक डिवाइडर का काम चल रहा है। बस्ती के सड़क सीमा में आने से सड़क का काम रूक गया। गत दिनों प्रशासन ने अतिक्रमियों को नोटिस जारी कर स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने को पाबंद भी किया था। बीच में अतिक्रमण हटाने के प्रयास भी हुए, लेकिन कुछ ने स्वेच्छा से अतिक्रमण हटा लिए तो अधिकांश मौके पर ही जमे रहे।
बुधवार को प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए कार्रवाई शुरू की। सुबह जल्दी ही प्रशासनिक अमला अतिक्रमण हटाने मौके पर पहुंचा। लोग संभल पाते, इससे पहले ही सैकड़ों पुलिस और नगरपालिका कर्मचारियों की मौजूदगी में चार बुलडोजर अतिक्रमण हटाने में लग गए। सड़क किनारे के साथ ही प्रशासन ने मिनी सचिवालय परिसर तक बने अतिक्रमणों को जमीद्दोज करवा दिया। शाम तक पूरी बस्ती मलबे के ढेर में बदल गई।
सुबह जैसे ही बुलडोजर चले, लोग आनन-फानन में सामान समेटने लगे। किसी ने सड़क पर तो किसी ने ट्रैक्टरों में सामान भरा। पुलिस एवं पालिका कर्मचारियों ने भी इसमें मदद की तथा घरों में रखे सामानों को बाहर निकलवाकर ट्रैक्टरों व दूसरी जगह रखवाया।
अतिक्रमण हटाने के दौरान कई बार लोगों ने कार्रवाई का विरोध भी किया। पुलिस ने कभी सख्ती तो कभी समझाईश से लोगों का विरोध शांत करवाया। इस बीच एक युवक अपने कच्चे मकान के टीनशेड पर चढ़ गया। बुलडोजर व मौके पर खड़े पुलिस एवं नगरपालिका कर्मचारियों पर ईंटें फेंकनी शुरू कर दी। एक पुलिसकर्मी ने पीछे दीवार से टीनशेड पर चढकऱ युवक को दबोचा तथा नीचे लाकर थाने पहुंचाया।
कार्रवाई के दौरान मिनी सचिवालय परिसर को खाली करने की मंशा से अधिकारियों ने बस्ती के पीछे बने अधिवक्ताओं के टीनशेड को भी ढहाना शुरू कर दिया। सूचना पर बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौके पर पहुंचे और विरोध जताया। अधिकारियों एवं अधिवक्ताओं के बीच नोकझोंक हुई। मामला गर्माता देख पुलिस को बीच बचाव करना पड़ा।
भूखे-प्यासे बिलखते रहे बच्चे सुबह कार्रवाई शुरू होते ही लोग अपने घरों में रखे सामानों को बचाने में जुट गए। महिला व पुरुषों के साथ बच्चे व बुजुर्ग भी गर्मी में पसीने से तरबतर टूटते आशियानों में बची थोड़ी बहुत उम्मीद को समेटने में जुट गए। मासूम भूख से बिलखते रहे। परिजनों की नम आंखों को देख बच्चे भी रोते नजर आए। हालांकि बाद में प्रशासन द्वारा इनके लिए खाने की व्यवस्था करवाई गई।
कार्रवाई शुरू होते ही हर कोई अधिकारियों से अपने आशियाने बचाने की मिन्नते करते नजर आया। यहां रोते-बिलखते एक बुजुर्ग महिला अचेत हो गई। महिला पुलिसकर्मियों व परिजनों ने संभाला तथा पुलिस जीप में डालकर अस्पताल में भर्ती कराया।
सूत्रों की माने तो मिनी सचिवालय बनने के दौरान इन लोगों के पुनर्वास के लिए नगरपालिका से प्रस्ताव सरकार को भेजा गया, जो कागजों में अटक गया। मौजूदा सरकार में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के निर्देश पर फिर प्रस्ताव भेजा गया। सरकार से इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिल चुकी है। करीब तीन दर्जन परिवारों को पुनर्वास करवाया जाएगा। इन्हें खेराई बीड़ में पट्टेशुदा निशुल्क भूखंड मुहैया करवाए गए है। आवास के लिए शहरी प्रधानमंत्री आवास योजना में पत्रावलियां तैयार करवाकर अनुदान दिलाया जाएगा।
सभी परिवारों को वैकल्पिक भूखंड उपलब्ध करवाने एवं पुनर्वास प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। इन परिवारों को 450 वर्ग फीट के भूखण्ड के आवंटन पत्र प्रदान किए। आवास योजना के अंतर्गत करीब ढाई लाख रुपए तक का लाभ भी दिया जाएगा।
मनोज मालव, ईओ सांगोद
Updated on:
21 May 2026 12:23 pm
Published on:
21 May 2026 12:23 pm
