
सांभर झील से रेस्क्यू किए परिंदे, पत्रिका फोटो
Sambhar Lake tragedy: राजस्थान के नावांशहर की सांभर झील में लगातार दम तोड़ रहे पक्षियों की मौत का असली कारण आखिरकार 8वें दिन सामने आ गया। शनिवार को सेंटर फॉर एनिमल डिजीज रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक्स लैब बरेली से आई जांच रिपोर्ट में इनकी मौतों का कारण एक बार फिर एवियन बोटुलिज्म बीमारी होना सामने आया है। यह बीमारी क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम नामक कीटाणु से पक्षियों में फैली, जिससे पक्षियों की मौत हो रही है। इससे पहले भी बोटुलिनम से ही पक्षियों की मौतें हुई थीं। अब तक झील में 87 परिदों की मौत हो चुकी है जबकि 9 पक्षियों को इलाज के बाद झील में छोड़ा गया है।
सांभर झील में पक्षियों की मौत सामने आने के बाद यहां से सैंपल सेंटर फॉर एनिमल डिजीज रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक्स, (सीएडीआरएडी) इज्जतनगर बरेली को जांच के लिए भेजे गए थे। वहां से सैंपल की जांच रिपोर्ट शनिवार को मिली। जांच रिपोर्ट के अनुसार, 31 अक्टूबर को सांभर झील राजस्थान से 3 मृत पक्षी, 2 मृत मछलियां और मृत कीड़ों के नमूने लिए गए थे। ये सैंपल 1 नवंबर 2025 को इज्जतनगर (बरेली) पहुंचे थे। इनकी जांच में सभी सैंपल पॉजिटिव पाए गए। वहीं बायोलॉजिकल आरटी-पीसीआर में एवियन इन्फ्लुएंजा के लिए सभी सैंपल नेगेटिव पाए गए। यानी मृत पक्षियों में एवियन इन्फ्लुएंजा नहीं था, लेकिन बोटुलिज्म टॉक्सिन की पुष्टि हुई। जांच में पैथोलॉजिकल तौर पर लिए गए दो पक्षियों के शव अत्यधिक सड़े हुए होने के कारण उनकी आंतरिक जांच नहीं हो सकी। तीसरे पक्षी (कॉमन कूट) की पोस्टमार्टम स्थिति सामान्य पाई गई।
रिपोर्ट के साथ आई टीम के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. एसके विश्वास और जॉइंट डायरेक्टर सोहिनी डे, सेंटर फॉर एनिमल डिजीज रिसर्च एंड डायग्नॉस्टिक, इज्जतनगर बरेली ने बताया कि कुछ जांचें अभी भी जारी हैं। उनकी विस्तृत रिपोर्ट जल्दी ही प्रशासन के साथ शेयर की जाएगी। डॉक्टरों ने पक्षियों के बचाव और रोग की रोकथाम के लिए कुछ उपाय भी सुझाए हैं।
मृत पक्षियों और जानवरों के शवों को तुरंत हटाकर सुरक्षित निपटान किया जाए।
झील और आसपास की जगह की नियमित साफ-सफाई की जाए।
पक्षियों को सड़ा या दूषित भोजन न मिले इसकी निगरानी हो।
अचानक लकवा या मौत की स्थिति दिखने पर तुरंत सूचना दी जाए।
पशु चिकित्सा, स्वास्थ्य और पर्यावरण विभाग कार्य करें।
बोटुलिज्म क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम बैक्टीरिया के टॉक्सिन से होने वाली गंभीर बीमारी है। इससे पक्षियों को लकवा हो जाता है और मौत हो जाती है। यह विषाक्त तत्व सड़े-गले भोजन, दूषित पानी या मृत जीवों के शरीर में पनपता है।
पशुपालन विभाग के डॉक्टर मोतीराम चौधरी ने बताया कि झील से रेस्क्यू किए गए सभी घायल और कमजोर पक्षियों को तुरंत मिठड़ी स्थायी रेस्क्यू सेंटर भेजा जा रहा है। वहां डॉक्टरों की टीम द्वारा निरंतर इलाज जारी है। वर्तमान में 5 पक्षियों का वैक्सीनेशन किया जा रहा है। जो पक्षी पूरी तरह स्वस्थ हुए हैं उन्हें वापस झील में छोड़ दिया गया है।
Updated on:
09 Nov 2025 09:01 am
Published on:
09 Nov 2025 07:57 am
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