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Art Of Saying No: क्यों जरूरी है ‘ना’ कहना? जानें मेंटल हेल्थ को सुरक्षित रखने के लिए ना कहने के 4 आसान तरीके 

Benefits Of Saying No: भारतीय परिवारों में, विशेषकर महिलाओं के लिए, अपनों को 'ना' कहना किसी अपराध से कम नहीं माना जाता। ऐसे में, न चाहते हुए भी दूसरों को खुश रखने की इस कोशिश में हम अक्सर अपनी मानसिक शांति और सेहत की कीमत चुकाते हैं। आइए, जानते हैं कि 'ना' कहना कितना जरूरी होता है।

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How To Say no without guilt, Saying no at work

Mental Health के लिए 'ना' कहने का सही तरीका (representative image) image credit gemini

How To Say No Politely: हम सभी के साथ अक्सर ऐसा होता है कि आप दिनभर की थकान के बाद आराम करना चाहते हैं या वीकेंड पर सिर्फ अपने लिए समय निकालना चाहते हैं। तभी परिवार के किसी सदस्य या किसी करीबी दोस्त का फोन आता है और वे आपसे किसी काम की उम्मीद करते हैं या फिर मिलने का प्लान बना लेते हैं। आपका शरीर और दिमाग दोनों 'ना' कहना चाहते हैं, लेकिन आपके मुंह से निकलता है, 'हां, जरूर।' फोन रखते ही आप तनाव से भर जाते हैं। आइए जानते हैं कि 'ना' कहना क्यों जरूरी है और इसके प्रभावी तरीके क्या हैं।

हमेशा 'हां' कहना है मानसिक बोझ

मनोविज्ञान में हर बात पर सहमति जताने और अपनी जरूरतों को पीछे रखने की इस आदत को 'पीपल प्लीजिंग' कहा जाता है। हम अपनों के नाराज होने के डर से हर बात मान लेते हैं। अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के शोध बताते हैं कि जो लोग लगातार दूसरों की जरूरतों को खुद से ऊपर रखते हैं, वे तनाव और बर्नआउट का शिकार होते हैं। जब हम मजबूरी में 'हां' की बात मानते हैं, मन में एक चिढ़ पैदा होने लगती है। मनोविज्ञान इसे 'रिजेंटमेंट' कहता है। यह हमारे सबसे करीबी रिश्तों में भी गहरी कड़वाहट भर देती है।

'ना' कहने के 4 प्रभावी तरीके

1. सैंडविच तकनीक: मनोवैज्ञानिक 'ना' कहने के इस तरीके को सबसे कारगर मानते हैं। इसमें 'ना' को दो सकारात्मक बातों के बीच एक सैंडविच की तरह रख सकती हैं। जैसे- 'मुझे बहुत अच्छा लगा कि आपने मुझे याद किया, लेकिन आज मैं बहुत थकी हूं इसलिए नहीं कर पाऊंगी, हम अगले हफ्ते इस बारे में बात करते हैं।' इससे सामने वाले का सम्मान भी बना रहता है।

2. जवाब देने में समय लें: हम अक्सर दबाव में आकर तुरंत 'हां' कह देते हैं। इसका सबसे अच्छा इलाज है, हमेशा थोड़ा समय मांगना। जब भी कोई आपसे कुछ कहे, तो तुरंत हामी भरने के बजाय कहें, 'मैं अपना काम और शेड्यूल देखकर आपको बताती हूं।' यह छोटा सा ठहराव आपको सोचने का वक्त देता है और जल्दबाजी में किए गए किसी भी वादे से बचाता है।

3. डिजिटल दूरियां तय करें: अगर किसी रिश्तेदार या दोस्त की देर रात कॉल करने की आदत है, तो उसे तुरंत उठाना जरूरी नहीं है। उनके लिए अपनी नींद खराब न करें। अगले दिन सुबह आराम से मैसेज करें कि 'कल रात मैं जल्दी सो गई थी, सब ठीक है न?' इससे बिना लड़े यह स्पष्ट संदेश चला जाता है कि आपके आराम का समय आपके लिए अहम है।

4. झूठे बहानों से बचें: कई बार हम 'ना' कहने के लिए झूठे बहाने बनाते हैं, जिससे बाद में पकड़े जाने का डर और तनाव दोनों बढ़ते हैं। बहाने बनाने के बजाय विनम्रता से सच बोलना ज्यादा असरदार होता है। किसी के लिए भी अपनी स्पष्टता को दांव पर न लगाएं। इसकी बजाय कहें कि 'मैं जिम्मेदारी को लेने की स्थिति में नहीं हूं।' यह एक बहुत ही स्पष्ट, सरल और सम्मानजनक जवाब है।

करें खुद से प्यार की शुरुआत

'ना' कहना एक बहुत जरूरी कला है। शुरुआत में जब आप परिवार में किसी को 'ना' कहेंगे, तो उन्हें थोड़ा अजीब लग सकता है। क्योंकि उन्हें हमेशा आपकी 'हां' सुनने की आदत है, लेकिन धीरे-धीरे वे आपकी प्राथमिकताओं का सम्मान करना सीख जाएंगे। सच्ची परवाह वही है, जहां आपकी अपनी पहचान और मेंटल हेल्थ भी पूरी तरह सुरक्षित रहे। याद रखिए, एक शांत और स्पष्ट 'ना', एक थके हुए और मजबूरी में कहे गए 'हां' से हमेशा बेहतर होती है।