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बच्चों को मिट्टी में खेलने देना चाहिए या नहीं? NCBI से जानें त्वचा और इम्यून सिस्टम पर क्या पड़ता है असर

Is It Safe For Toddlers To Play In Soil: बच्चों को मिट्टी में खेलने देने से उनके शरीर पर क्या असर पड़ता है? मिट्टी के सूक्ष्मजीव बच्चों की त्वचा, माइक्रोबायोम और इम्यून सिस्टम को कैसे प्रभावित करते हैं, आइए जानते हैं।
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Kids Playing In Soil, Soil Microbes

Is It Safe For Toddlers To Play In Soil (representative image) image credit Magnific

Benefits Of Playing In Soil: बच्चों को मिट्टी में खेलते देख कई माता पिता तुरंत उन्हें रोक देते हैं। उन्हें डर रहता है कि मिट्टी में मौजूद गंदगी और कीटाणुओं से बच्चा बीमार न पड़ जाए। वैज्ञानिकों ने भी इसपर रिसर्च की है कि प्राकृतिक मिट्टी और अलग अलग सूक्ष्मजीवों के संपर्क में आने से बच्चों के शरीर पर क्या असर पड़ता है। कुछ रिसर्च में बच्चों की त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया और इम्यून सिस्टम से जुड़ी प्रक्रियाओं में बदलाव देखे गए हैं। आइए जानते हैं कि बच्चों का मिट्टी और प्राकृतिक जगहों पर खेलना उनके शरीर को किस तरह प्रभावित कर सकता है। 

मिट्टी में खेलने से बच्चों की त्वचा पर क्या असर पड़ा?

नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) पर पब्लिश एक रिसर्च के अनुसार, एक शोध में 3 से 5 साल की उम्र के बच्चों को शामिल किया गया था। इस रिसर्च में बच्चों को दो ग्रुप में रखा गया। एक ग्रुप के बच्चों को ऐसी रेत में खेलने दिया गया, जिसमें अलग अलग तरह के सूक्ष्मजीवों वाली मिट्टी मिलाई गई थी। दूसरे ग्रुप को माइक्रोबियल रूप से कम विविध रेत दी गई। बच्चों ने 14 दिनों तक दिन में दो बार करीब 20 मिनट सैंडबॉक्स में खेला। रिसर्च के दौरान उनकी त्वचा और आंत में मौजूद बैक्टीरिया के साथ खून के सैंपल भी लिए गए। शोधकर्ताओं ने इसके बाद बच्चों के शरीर में हुए बदलावों की जांच की।

रिसर्च में पाया गया कि माइक्रोबियल विविधता वाली मिट्टी के संपर्क में रहने वाले बच्चों की त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया के समूह में बदलाव आया। उनकी त्वचा के बैक्टीरिया उस मिट्टी में मौजूद बैक्टीरिया के ज्यादा करीब दिखाई देने लगे। बच्चों को 14 दिनों तक इस तरह की रेत में खेलने दिया गया। इसके बाद त्वचा के बैक्टीरिया में हुए बदलावों को 28 दिनों तक फॉलो किया गया। 28 दिन बाद भी त्वचा के बैक्टीरिया में बदलाव देखा गया।

इम्यून सिस्टम से जुड़े दिखे बदलाव

रिसर्च में बच्चों के खून में मौजूद कुछ इम्यून मार्कर्स की भी जांच की गई। इसमें इंटरल्यूकिन 10 यानी IL 10 के स्तर और IL 10 तथा IL 17A के अनुपात में बदलाव देखा गया। शोधकर्ताओं ने इन बदलावों को इम्यून सिस्टम के रेगुलेशन से जोड़ा। रिसर्च में रेगुलेटरी टी सेल्स यानी Treg cells की मात्रा में भी बदलाव देखा गया और यह बदलाव त्वचा पर मौजूद कुछ बैक्टीरिया से जुड़ा पाया गया। ये कोशिकाएं शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया को कंट्रोल करने में मदद करती हैं। हालांकि, इस रिसर्च से यह साबित नहीं होता कि मिट्टी में खेलने से बच्चों को एलर्जी या दूसरी बीमारियां नहीं होंगी।

प्राकृतिक जगहों पर खेलने को लेकर दूसरी रिसर्च में क्या मिला?

नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) में पब्लिश एक दूसरी रिसर्च में बच्चों के डे केयर सेंटर के आसपास प्राकृतिक वातावरण में बदलाव करके उसके असर को देखा गया। इसमें मिट्टी, पौधों और दूसरी प्राकृतिक चीजों को शामिल करके आसपास की माइक्रोबियल विविधता बढ़ाई गई। इस रिसर्च में बच्चों की त्वचा और आंत में मौजूद माइक्रोबायोटा में बदलाव देखे गए। साथ ही, इम्यून सिस्टम से जुड़े कुछ बदलाव भी सामने आए। इससे शोधकर्ताओं को यह संकेत मिला कि प्राकृतिक वातावरण में मौजूद माइक्रोबियल विविधता बच्चों के माइक्रोबायोम और इम्यून सिस्टम से जुड़ी प्रक्रियाओं पर असर डाल सकती है।

बच्चों को मिट्टी में खेलने देना चाहिए या नहीं?

रिसर्च से यह पता चलता है कि बच्चों के सुरक्षित प्राकृतिक जगहों पर खेलने से वे अलग अलग तरह के सूक्ष्मजीवों के संपर्क में आ सकते हैं। इससे उनकी त्वचा और शरीर में मौजूद माइक्रोबायोम में कुछ बदलाव देखे गए हैं। रिसर्च में इम्यून सिस्टम से जुड़े कुछ बदलाव भी सामने आए हैं, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि मिट्टी में खेलने से बच्चों की इम्यूनिटी मजबूत होती है या वे बीमारियों से बच जाते हैं। इसलिए बच्चों को खेलने के लिए साफ और सुरक्षित मिट्टी वाली जगह चुनें। गंदी या दूषित मिट्टी से बच्चों को दूर रखना चाहिए। इसके साथ ही खेलने के बाद बच्चे का हाथ साबुन से अच्छी तरह धुलवाएं और बच्चों को खेलते समय मिट्टी मुंह में डालने से रोकें।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है।