
मिर्जापुर का पोस्टर / Credit - PVRCinemasOfficial
Mirzapur Famous Melas: मिर्जापुर (Mirzapur) वेबसीरीज और फिर फिल्म ने इस शहर को खून-खराबे और गैंगस्टर वाली इमेज में तब्दील कर दिया है, लेकिन असल जिंदगी में यह जगह पर्दे से बिल्कुल अलग है। ऐसे में आप इस शहर को करीब से देखने के लिए यहां बताए गए मेलों को घूमने जा सकते हैं।
मिर्जापुर से लगभग 2 किलोमीटर दक्षिण में हनुमान जी का पुराना मंदिर है। जहां कार्तिक पूर्णिमा और सावन महीने (जुलाई–अगस्त) के हर शनिवार को इस मंदिर को घी के दीयों से सजाया जाता है और इसी समय यहां बड़ा मेला लगता है। इस मेले की सबसे खास चीज टैटू डिजाइन और लोक कला होती है। दूर-दूर से लोग इसे देखने आते हैं।
यहां पर विंध्याचल धाम भी उतना ही फेमस है जिसे आप नीचे देख सकते हैं-
ओझला दरअसल उज्ज्वला नदी Ojhala River का पुराना नाम है। यहां साल 1920 से लगातार मेला लगता आ रहा है। इसे परंपरा और साहस का प्रतीक माना जाता है। पहले यहां पानी में होने वाले खेल भी होते थे और यह जगह अपनी खास गतिविधियों के लिए जानी जाती थी। अब पानी की कमी की वजह से वो पुराने खेल बंद हो गए हैं, लेकिन मेला आज भी लगता है और लोग बड़ी संख्या में आते हैं।
दीप महोत्सव दिवाली के समय मनाया जाता है। इस दिन गंगा घाट (Ganga Ghats) को घी के दीयों से सजाया जाता है। कार्तिक अमावस्या की रात पूरा घाट रोशनी से जगमगा उठता है और लोग इसे बड़े उत्साह और खुशी के साथ मनाते हैं।
झूलनोत्सव सावन महीने में बारिश के मौसम में मनाया जाता है। इस दौरान पेड़ों की शाखाओं पर झूले लगाए जाते हैं और लोग पांच दिनों तक झूलने का आनंद लेते हैं। इस समय द्वारकाधीश मंदिर, गंगा जमुना सरस्वती मंदिर और कुंज भवन को बहुत सुंदर तरीके से सजाया जाता है, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय बन जाता है।
कांटित मेला विंध्याचल रेलवे स्टेशन Vindhyachal Railway Station के पास हजरत ख्वाजा इस्माइल चिश्ती की दरगाह के पास लगता है। वे ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के शिष्य थे, जिनकी दरगाह अजमेर, राजस्थान Ajmer Sharif Dargah में स्थित है। यह मेला रज्जब महीने की 6 तारीख को लगता है और यह सभी धर्मों के लोगों को जोड़ने और भाईचारे का संदेश देने के लिए जाना जाता है।
Updated on:
27 Jun 2026, 10:12 AM IST
Published on:
26 Jun 2026, 3:36 PM IST
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