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इस Summer Vacation बिना पासपोर्ट-वीजा के घूम आएं दो देश! यहां लोग सोते एक देश में हैं और खाना खाते दूसरे देश में!

Longwa Village: आज के इस लेख में हम एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां जाने के बाद आप एक साथ दो देशों को घूम सकते हैं। यहां के लोगों को दो देशों की नागरिकता मिलने के साथ ही इनका किचन एक देश में तो बेडरूम दूसरे देश में है। आइए जानते हैं इस अनोखी जगह के बारे में विस्तार से।

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Longwa Village Nagaland

Longwa Village Nagaland| image credit gemini

Longwa Village Nagaland: गर्मियों की छुट्टियां शुरू हो गई हैं, वहीं कुछ जगहों पर होने वाली हैं। ऐसे में लोग घूमने जाने के लिए प्लानिंग करनी शुरू कर चुके हैं, इसलिए कंफर्म ट्रेन या फ्लाइट की टिकट नहीं मिल रही हैं। इसके चलते अगर आप इस समर वेकेशन किसी ऑफबीट जगह पर घूमने जाना चाहते हैं, तो हमारा आज का यह लेख आपके काम आ सकता है। आज के इस लेख में हम एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां जाने के बाद आप एक साथ दो देशों को घूम सकते हैं। जी हां, सुनने में ये थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन ये सच है। यहां के लोगों को दो देशों की नागरिकता मिलने के साथ ही इनका किचन एक देश में तो बेडरूम दूसरे देश में है। आइए जानते हैं इस अनोखी जगह के बारे में विस्तार से कि कैसे आप यहां जा सकते हैं और किन-किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

यहां किचन एक देश में और बेडरूम दूसरे में

नागालैंड के मोन जिले में स्थित लोंगवा (Longwa) नाम का एक छोटा सा गांव बसा है। भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित यह गांव अपनी दोहरी नागरिकता और संस्कृति के लिए जाना जाता है। यहां का मुख्य आकर्षण ग्राम प्रमुख यानी आंग का घर है, जो आधा भारत में और आधा म्यांमार में स्थित है। ऐसे में सोचिए, एक ही घर की छत के नीचे आप दो देशों की हवा में सांस ले रहे हैं। इसके अलावा यहां की कोन्याक नागा जनजाति के लोग दोनों देशों में बिना वीजा के आ-जा सकते हैं। यहां के निवासियों को फ्री मूवमेंट रेजिम (Free Movement Regime) के तहत दोनों देशों में बिना पासपोर्ट-वीजा के आने-जाने और काम करने की अनुमति है।

एक अनोखी पहचान और संस्कृति


लोंगवा गांव का आधा हिस्सा भारत में और आधा म्यांमार में होने का मुख्य कारण ब्रिटिश शासन के दौरान भारत और म्यांमार यानी बर्मा के बीच हुआ सीमा का बंटवारा है। जब अंग्रेजों ने सीमा रेखा खींची, तो वह लोंगवा गांव के बीच से होकर गुजरी, जिससे यह गांव दो हिस्सों में बंट गया। इसलिए यहां के लोग दोनों देशों का पासपोर्ट रखते हैं, दोनों देशों की संस्कृति को अपनाते हैं और त्योहारों को मिल-जुलकर सेलिब्रेट करते हैं।

ट्रिप से जुड़ी जरूरी जानकारी


लोंगवा जाने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा असम का डिब्रूगढ़ है, जो यहां से लगभग 140 किमी दूर स्थित है। आप दिल्ली, कोलकाता या गुवाहाटी से डिब्रूगढ़ के लिए फ्लाइट ले सकते हैं और वहां से मोन डिस्ट्रिक्ट तक पहुंचने के लिए टैक्सी या स्थानीय वाहन किराए पर ले सकते हैं। इसके अलावा, यदि आप सड़क मार्ग से आना चाहते हैं, तो मोन टाउन से लोंगवा की दूरी लगभग 42 किमी है, वहीं ट्रेन से यात्रा करने के इच्छुक यात्रियों के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन तिनसुकिया, असम है।

ध्यान दें, नागालैंड में प्रवेश के लिए भारतीय नागरिकों को इनर लाइन परमिट (ILP) की आवश्यकता होती है, जिसे आप ऑनलाइन बनवा सकते हैं। इसके साथ ही पहाड़ों में मौसम कभी भी बदल सकता है, इसलिए पैकिंग करते समय आरामदायक कपड़े, हाइकिंग बूट्स और हल्की जैकेट साथ रखें। यहां भारतीय रुपये मान्य हैं, इसलिए अपने साथ पर्याप्त कैश जरूर रखें।

यहां क्यों जाना चाहिए?


लोंगवा जाना किसी एडवेंचर से कम नहीं है। इसलिए अगर आप ऑफबीट ट्रैवलिंग के शौकीन हैं और इस समर विकेशन कुछ ऐसा देखना चाहते हैं, तो आप नागालैंड के इस गांव को एक्सप्लोर करने दोस्तों या परिवार के साथ जा सकते हैं।