
तमिलनाडु में पोंगल थाली | फोटो स्रोत: एआई जेमिनी
Pongal Festival Thali 2026: मकरसंक्रांति (Makar Sankranti 2026) भारत के कई जगहों पर मनाया जाता है, वहीं तमिलनाडु में यह त्योहार को पोंगल के नाम से मनाया जाता है। पोंगल का त्योहार और इस दिन का खास खाना दोनों जब मिलते हैं, तो कुछ अलग ही जादू होता है। जब बात तमिलनाडु के इस खास फसल कटाई के त्योहार की हो तो पोंगल थाली के बिना ये त्योहार बिल्कुल अधूरा है। ये कोई आम खाना नहीं है, बल्कि सूरज भगवान, बारिश और धरती को धन्यवाद (Thank You) कहने का एक तरीका है। तो आइए जानें इस थाली की खासियत।
तमिलनाडु में और इसके आस-पास की जगहों पर मकर संक्रांति को पोंगल नाम से मनाया जाता है। यहां ये त्योहार पूरे 4 दिन के लिए मनाया जाता है, जिसमें पहले दिन भोगी पोंगल, दूसरे दिन सूर्य पोंगल, तीसरे दिन मट्टू पोंगल और चौथे दिन कन्या पोंगल मनाया जाता है। यहां एक अलग ही रिवाज है, जैसे कि लोग इस दिन मिट्टी के बर्तन में चावल, दूध और गुड़ को उबालते हैं। जब ये उबाल खाकर बर्तन से बाहर निकलने लगता है, तो सब मिलकर "पोंगलो पोंगल" नारे लगाते हैं। इस पकवान को सबसे पहले सूर्य भगवान को चढ़ाया जाता है।
पोंगल थाली में कोई प्लेट इस्तेमाल नहीं की जाती है। सब एक साफ केले का पत्ता होता है और उसपर सारे डिशेज को रखा जाता है। यही होती है पोंगल की असली थाली। इन डिशेज में स्टार फूड होता है सक्करै पोंगल। इसे चावल, मूंग दाल, गुड़ और घी से बनाया जाता है और ये मीठा होता है। इसके बाद आता है वेन पोंगल जो कि एक नमकीन वर्जन है और इसे काली मिर्च (Black Pepper) और जीरे के तड़के के साथ बनाया जाता है। अब आता है सांबर, ये इमली के रस और अलग-अलग सब्जियों से बनता है। साथ में दाल और सब्जियों का माइल्ड, कोकोनट वाला करी कूटू, और रसम होता है… जो कि डाइजेशन में मदद करता है।
बीन्स या गाजर को सिंपल स्टर-फ्राई करके पोरियल बनाया जाता है, जिसे नारियल के साथ खाया जाता है। क्रिस्पी मेदु वड़ा या वड़ई होता है और साथ में थयिर पचड़ी जो दही बेस्ड की एक साइड डिश होती है। पायसम जो कि राइस का क्रीमी मीठा डेजर्ट होता है, प्लेन राइस, घी राइस, पापड़, अचार के बिना ये थाली पूरी नहीं होती है।
| केले का पत्ता |
| सक्करै पोंगल |
| वेन पोंगल |
| सांबर |
| कूटू |
| रसम |
| पोरियल |
| क्रिस्पी मेदु |
| थयिर पचड़ी |
| पायसम |
| प्लेन राइस |
| घी राइस |
| पापड़ अचार |
ये थाली सिर्फ खाना नहीं, एक फिलॉसफी (Philosophy) है। इसकी हर डिश एक मैसेज देती है जैसे कि अबंडेंस की, ग्रैटिट्यूड की, और नेचर के साथ कनेक्शन की।जब बर्तन से चावल उबाल खा कर बाहर गिरता है तो ये अबंडेंस के सिंबल के तौर पर दिखा जाता है। थाली में जो सब्जियां या समान इस्तेमाल होता है वो सब सीजन में हार्वेस्ट हुए होते हैं। ये धरती के साथ कनेक्शन ही मील को स्पेशल बनाता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, पोंगल जैसे फेस्टिवल्स हमें याद दिलाते हैं कि स्लो डाउन करके, परिवार के साथ बैठो, और खाना शेयर करना कितना अच्छा होता है। ये न्यूट्रिशनली बैलेंस्ड खाना जैसे दाल से प्रोटीन, राइस से कार्बोहाइड्रेट्स, सब्जियों से विटामिन्स सब कम्प्लीट मील है जो बॉडी और सोल दोनों को नरिश करता है। केले के पत्ते पर बैठकर हाथ से खाने का अनुभव ही कुछ और होता है।
Published on:
07 Jan 2026 03:11 pm
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