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क्या आप भी बिना गलती के सफाई देते रहते हैं? कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय से जानें मौन रहने की शक्ति

Motivational quotes by Indresh Upadhyay: आज के समय में लोग हर बात की सफाई देने में लगे रहते हैं, लेकिन ऐसे में अगर आप हर बात में सफाई देने लगते हैं, तो कहीं न कहीं आप अपने जीवन की शांति खोने लगते हैं। ऐसे में उस समय क्या करना चाहिए, आइए आज के इस लेख में कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय से जानते हैं।

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Inspirational quotes of Indresh Upadhyay

Inspirational quotes of Indresh Upadhyay| image credit gemini

Inspirational Quotes of Indresh Upadhyay: जीवन की भागदौड़ में अक्सर ऐसा समय आता है जब हमें लगता है कि लोग हमें गलत समझ रहे हैं या हमारे खिलाफ बातें हो रही हैं। ऐसी स्थिति में हमारा स्वभाव तुरंत सफाई देने या बहस करने का होता है, जिससे मन में जबरदस्त हड़बड़ी पैदा होती है। ऐसे में अगर आप कुछ करते हैं, तो वह बात पहले से भी ज्यादा बिगड़ सकती है। ऐसे समय में क्या करना चाहिए और क्या नहीं, आइए आज के इस लेख में गुरु इंद्रेश उपाध्याय जी से जानते हैं।

इंद्रेश उपाध्याय के प्रेरणादायक विचार (Motivational Thoughts by Indresh Upadhyay)

गुरु इंद्रेश उपाध्याय जी का मानना है, "यदि किसी व्यक्ति का कोई अपराध नहीं है, तो उसे चुप रहना चाहिए क्योंकि सत्य का स्वभाव ही ऐसा है कि वह अपना मार्ग खुद ढूंढ लेता है और समय आने पर अपने आप प्रकट हो जाता है।" जब आप बिना मतलब के बहस में पड़ते हैं, तो आप अपनी मानसिक शांति खो देते हैं।

इसे जीवन में कैसे अपनाएं? (How to Incorporate This Into Your Life)

सफलता और मानसिक शांति का गहरा संबंध हमारे धैर्य से है। इसे अपने जीवन में उतारने के लिए सबसे पहले सफाई देने की जिद छोड़ें। जब आप जानते हैं कि आपने कुछ गलत नहीं किया है, तो मौन धारण करना ही आपकी सबसे बड़ी शक्ति है। यह मौन आपकी ऊर्जा को बचाता है, जिसे आप अपने महत्वपूर्ण कार्यों में लगाकर सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

शांत मन से सफलता की ओर (Success Through a Calm Mind)

जिस तरह सूर्य के बादलों के पीछे होने पर भी उसके होने का प्रमाण देने की जरूरत नहीं पड़ती, उसी प्रकार आपका चरित्र और आपका सत्य समय आने पर स्वयं चमक उठेगा। भविष्य की करना बंद करें और अपना पूरा ध्यान आज के काम पर लगाएं। जब मन शांत होता है, तो ही आप अपना काम सही रुप से कर पाएंगे। याद रखें मानसिक शांति का असली राज बाहर की दुनिया को जीतने में नहीं, बल्कि खुद को भीतर से स्थिर रखने में है।