
bigamy law India | image credit gemini
Women's Day Special: कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि शादी के बाद कपल के बीच सब कुछ सही होने के बावजूद, बच्चा ना होने का बहाना बनाकर पति दूसरी शादी करने का दबाव पत्नी पर डालता है। ऐसे में समाज के डर या अपने में कमी होने की सोच के कारण महिलाएं ज्यादातर चुप रहना पसंद करती हैं और पति को दूसरी शादी की अनुमति दे देती हैं। लेकिन ऐसे मामलों में सबसे पहले मेडिकल टेस्ट कराना चाहिए, क्योंकि कई बार कमी औरतों में नहीं बल्कि पति में हो सकती है। आज की स्टोरी में महिलाओं को ऐसे मामलों में क्या करना चाहिए, आइए इलाहाबाद हाई कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही एडवोकेट बुशरा अमन खान से जानते हैं।
कमी के आधार पर तलाक का अधिकार
अगर पति में कमी है और इसलिए शादी पूरी नहीं हो पाई है, तो पत्नी हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत तलाक या शादी रद्द करने की मांग कर सकती है। कोर्ट पति की कमी जांचने के लिए मेडिकल टेस्ट भी करवा सकता है। इसका मतलब है कि पत्नी को बच्चों के ना होने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
पति दूसरी शादी नहीं कर सकता
कानून के मुताबिक, अगर पहली शादी वैध और जीवित है, तो पति कानूनी रूप से दूसरी शादी नहीं कर सकता। अगर वह ऐसा करता है तो यह दोहरी शादी (Bigamy) मानी जाएगी और भारतीय दंड संहिता की धारा 494 के तहत अपराध है।
पत्नी को भरण-पोषण का अधिकार
पत्नी अपने पति से अपनी और अपने खर्चों की जिम्मेदारी का भरण-पोषण (maintenance) मांग सकती है। इसे सीआरपीसी की धारा 125 और हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत लिया जा सकता है। इससे पत्नी को आर्थिक सुरक्षा मिलती है।
मानसिक क्रूरता के खिलाफ अधिकार
अगर पति पत्नी को बिना वजह दोषी ठहराता है, अपमान करता है या मानसिक रूप से परेशान करता है, तो इसे मानसिक क्रूरता माना जाएगा। यह तलाक का एक वैध कारण है। कोर्ट में इसके खिलाफ शिकायत की जा सकती है।
घरेलू हिंसा से सुरक्षा
पत्नी घरेलू हिंसा से सुरक्षा, रहने का अधिकार और भरण-पोषण, Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 के तहत मांग सकती है। इससे पत्नी अपने घर में सुरक्षित रह सकती है और पति या उसके रिश्तेदारों से किसी भी तरह की हिंसा से बच सकती है।
Published on:
06 Mar 2026 03:50 pm
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