
Yogi
करिश्मा लालवानी.
लखनऊ. सीएम योगी आदित्यनाथ पर कई किताबें लिखी गयी हैं। इन्हीं में से एक किताब है जिसमें उनपर किए गए हमले का जिक्र किया गया है। ये किताब है "योगी आदित्यनाथ: द राइस ऑफ सैफ्रन सोशलिस्ट"। बात तब की है जब 7 सितम्बर, 2008 में योगी आदित्यनाथ आजमगढ़ के लिए रवाना हुए थे। तब उन पर जानलेवा हमला हुआ था। इस किताब में ये सब कुछ बयां किया गया है कि कैसे उनपर हमला हुआ था और कैसे वो इससे बच निकले।
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वैसे तो योगी आदित्यनाथ अपने फायर ब्रिगेड तेवर और विवादित बोल के चलते सुर्खियों में बने रहते हैं, लेकिन जानलेवा हमला होने के बाद भी इनके तेवर नहीं बदले। जब सीएम आदित्यनाथ पर हमला हुआ था, तब हमलावरों ने उनके वाहनों को घेर लिया था। किताब के मुताबिक 7 सितंबर 2008 की सुबह गोरखनाथ मंदिर से 40 वाहनों का काफिला निकला था। योगी की टीम को आजमगढ़ में कुछ गलत होने का अंदेशा पहले ही हो गया था, इसके चलते तैयारियां की जा चुकी थीं। काफिले में योगी की गाड़ी लाल रंग की एसयूवी थी जो सातवें नंबर पर चल रही थी। दोपहर 1 बजकर 20 मिनट पर आजमगढ़ से थोड़ा पहले इसी गाड़ी पर सबसे पहले पत्थर फेंका गया था। लेकिन टीम की सूझ-बूझ से योगी को घटना से पहले ही कतार में चल रही पहली गाड़ी में बैठा दिया गया था।
7वीं व बीच की अन्य गाड़ियों पर चारों तरफ से पत्थरों की बारिश होने लगी। इसी के बाद पेट्रोल बम से भी हमला किया गया। दहशत में आए योगी समर्थक इधर-उधर भागने लगे। काफिला अब तीन हिस्सों में बंट गया था। कतार में पहले की 6 गाड़ियां आगे निकल चुकी थी और बाकी पीछे रह गए। हमला करने वाले लोगों की प्री-प्लान तैयारी के तहत 7वीं और कतार में चल रही बाकी की गाड़ियों पर हमला जारी था। और उनमें मौजूद लोग हमले की चपेट में आ गए। हमलावरों ने वाहनों को घेरकर भी हमला किया, लेकिन योदी योगी आदित्यनाथ उनके हाथ नहीं लगे। योगी के गायब होने की जानकारी काफिले के शामिल योगी को समर्थकों को भी नहीं थी।
यहां बदली थी योगी ने गाड़ी-
योगी को काफिले की पहली गाड़ी में शिफ्ट करने का प्लान पहले से ही तैयार कर लिया गया था। दरअसल पीडब्ल्यूडी के गेस्ट हाउस में उनका काफिला कुछ देर के लिए रुका था, जहां से निकलने से पहले अंतिम समय में ही उनको 7वीं गाड़ी से पहले गाड़ी में शिफ्ट कर दिया गया था।
पुलिस महकमें में मच गया था हड़कंप-
किताब के मुताबिक हमले की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया था। जानकारी मिलते ही स्टेशनों से टीमें भेजी गईं। सिटी सर्किल अॉफिसर शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने जवाबी कार्रवाई का भी आदेश दिया। इसमें एक शख्स मारा गया। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन योगी की उस वक्त किसी को खबर नहीं थी। किसी को नहीं पता था कि योगी तो पहले ही सुरक्षापूर्वक बहुत आगे निकल चुके थे।
पहले भी हो चुकी है साजिश-
योगी को गोरखपुर दंगों के दौरान गिरफ्तार भी किया गया था। मोहर्रम के दौरान फायरिंग में एक हिन्दू युवा की जान भी चली गई थी, पर अधिकारियों ने उन्हें जानकारी दी कि वह बुरी तरह जख्मी है। और उन्हें वहां जाने से मना कर दिया। ज़िद पर अड़े योगी ने अगले दिन शहर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन करने की घोषणा की और जब जिलाधिकारी ने इसकी अनुमति नहीं दी तो हजारों समर्थकों के साथ उन्होनें अपनी गिरफ्तारी दी।
पहले भी जा चुके हैं आजमगढ़-
योगी पहली बार सन् 1989-90 में आजमगढ़ गए थे। यहां एक पुजारी की हत्या होने पर सीएम योगी ने उन्हें न्याय दिलाने की मांग की थी। इसके बाद वो 2003 में आजमगढ़ गए थे। तब शिल्बी कॉलेज के छात्र संघ चुनाव के दौरान छात्र नेता अजीत की हत्या कर दी गयी थी। उनके परिजनों को न्याय दिलाने के लिए सीएम योगी आजमगढ़ गए थे। हां, ये बात और है कि उस वक्त के डीएम और एसपी ने उन्हें किसी कारणवश आने नहीं दिया था।
किया गया सीएम का सर्मथन-
जब सीएम योगी को गिरफ्तार किया गया था, तब कई लोग उनके सर्मथन में आए थे। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनकी गिरफ्तारी होते ही मुंबई-गोरखपुर गोदान एक्सप्रेस के कुछ डिब्बे फूंक दिए गए थे। यह दंगे पूर्वी उत्तर प्रदेश के छह जिलों और तीन मंडलों में भी फैल गए। उनकी गिरफ्तारी के अगले दिन ही जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारियों का तबादला हो गया।
Updated on:
22 Nov 2017 10:54 pm
Published on:
22 Nov 2017 10:21 pm
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