
बंदरिया बाग में 'संविधान हत्या दिवस' का पोस्टर, लखनऊ में छिड़ी नई राजनीतिक बहस (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)
Emergency Poster War in Lucknow: Constitution Murder Day Message Sparks Political Debate: राजधानी लखनऊ में गुरुवार को एक बार फिर राजनीतिक पोस्टर वार देखने को मिला। शहर के प्रमुख चौराहों में शामिल बंदरिया बाग चौराहे पर एक बड़ा पोस्टर लगाया गया, जिसमें लिखा गया - "संविधान हत्या दिवस- कांग्रेस द्वारा लगाए गए आपातकाल के काले अध्याय के 51 वर्ष पूर्ण"। पोस्टर के माध्यम से वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल को देश के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे काला अध्याय बताते हुए लोगों को उस दौर की याद दिलाने का प्रयास किया गया।
पोस्टर में यह संदेश दिया गया कि 25 जून 1975 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा देश में आपातकाल लागू किया गया था, जिसने लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना को गहरा आघात पहुंचाया। पोस्टर के जरिए उस घटना को "संविधान हत्या दिवस" के रूप में याद करते हुए कहा गया कि देश के नागरिकों को उस दौर को कभी नहीं भूलना चाहिए, जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रेस की आजादी और नागरिक अधिकारों पर व्यापक प्रतिबंध लगाए गए थे।
राजनीतिक गलियारों में इस पोस्टर को लेकर चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया है। राजधानी के व्यस्त चौराहे पर लगाए गए इस पोस्टर को राहगीरों और आम लोगों ने भी काफी देर तक देखा और इसके संदेश को लेकर आपस में चर्चा करते नजर आए।
देश में आपातकाल लगाए जाने की घटना को 51 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन आज भी यह विषय राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बना हुआ है। हर वर्ष 25 जून को विभिन्न राजनीतिक दल और संगठन इस दिन को अलग-अलग दृष्टिकोण से याद करते हैं। एक ओर जहां कांग्रेस इस निर्णय को तत्कालीन परिस्थितियों से जोड़कर देखती है, वहीं विपक्षी दल इसे लोकतंत्र की हत्या और संवैधानिक मूल्यों पर हमला करार देते हैं।
बंदरिया बाग चौराहे पर लगाए गए पोस्टर में भी इसी भावना को प्रमुखता से उकेरा गया है। पोस्टर के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि देश के लोकतांत्रिक इतिहास के उस अध्याय को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति न हो सके।
पोस्टर सामने आने के बाद राजधानी की राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी दिनों में इस मुद्दे पर विभिन्न दलों के बीच बयानबाजी और अधिक बढ़ सकती है। पिछले कुछ वर्षों से 25 जून को "संविधान हत्या दिवस" के रूप में मनाने की परंपरा ने राजनीतिक विमर्श को नया आयाम दिया है और अब यह दिन केवल ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि समकालीन राजनीति का भी महत्वपूर्ण विषय बन गया है।
लखनऊ में लगाए गए इस पोस्टर ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आपातकाल की घटना आज भी देश की राजनीति में जीवंत मुद्दा बनी हुई है। राजधानी की सड़कों पर लगे ऐसे पोस्टर न केवल राजनीतिक संदेश देते हैं, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों पर चर्चा को भी नया मंच प्रदान करते हैं।
बंदरिया बाग चौराहे से गुजरने वाले लोगों के बीच यह पोस्टर पूरे दिन चर्चा का विषय बना रहा। कई लोगों ने इसे लोकतंत्र की रक्षा की याद दिलाने वाला संदेश बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना। हालांकि, यह तय है कि इस पोस्टर ने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया और एक बार फिर आपातकाल के इतिहास को जन चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया।
राजधानी लखनऊ में हुए इस पोस्टर वार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजनीतिक दल ऐतिहासिक घटनाओं को वर्तमान राजनीतिक विमर्श से जोड़कर जनता तक अपना संदेश पहुंचाने का कोई अवसर नहीं छोड़ना चाहते। "संविधान हत्या दिवस" को लेकर लगाया गया यह पोस्टर भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है, जिसने 51 वर्ष पुराने आपातकाल के मुद्दे को एक बार फिर सार्वजनिक बहस का विषय बना दिया है।
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Updated on:
25 Jun 2026 11:11 am
Published on:
25 Jun 2026 11:11 am
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