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खुशखबर, औषधीय पौधों की खेती में यूपी नम्बर वन, किसान हो रहे मालामाल

देश में औषधीय खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है। औषधीय पौधों की खेती से किसान मालामाल हो रहें है। औषधीय खेती में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। नेशनल मेडिसिनल प्लांट बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, यूपी में करीब 12,3000 हेक्टेयर भूमि पर मेडिसनल प्लांट की खेती की जा रही है।

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खुशखबर, औषधीय पौधों की खेती में यूपी नम्बर, किसान हो रहे मालामाल

खुशखबर, औषधीय पौधों की खेती में यूपी नम्बर, किसान हो रहे मालामाल

देश में औषधीय खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है। औषधीय पौधों की खेती से किसान मालामाल हो रहें है। औषधीय खेती में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। नेशनल मेडिसिनल प्लांट बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, यूपी में करीब 12,3000 हेक्टेयर भूमि पर मेडिसनल प्लांट की खेती की जा रही है। प्रदेश में विशेष रुप से बाराबंकी, अयोध्या, गोरखपुर, बरेली, पीलीभीत, ललितपुर, बहराइच, वाराणसी, गाजीपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, झांसी, हमीरपुर, चित्रकूट, सीतापुर, लखनऊ, गोंडा, बलरामपुर, जालौन आदि कई जिलों में औषधीय पौधों की 18 प्रजातियों की खेती की जा रही है।

यूपी में जड़ी-बूटियों का रोपण जोरों पर

सरकार किसानों आय को दोगुना करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। किसान भी होने वाले फायदों को देखकर औषधीय खेती कर रहे हैं। योगी आदित्यनाथ सरकार बड़े पैमाने पर औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा दे रही है। गांवों में पौधशालाएं स्थापित की गईं जबकि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में जड़ी-बूटियों का रोपण जोरों पर है।

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औषधीय खेती में बढ़ी दिलचस्पी

जिन औषधीय पौधों की खेती में यूपी के किसान गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं, उनमें तुलसी, एलोवेरा, अश्वगंधा, ब्राह्मी, सतावर, वच, आर्टेमिसिया, कौंच, कालमेघ और सर्पगंधा शामिल है। इसके अतिरिक्त गिलोय, भृंगराज, पुदीना, मोगरा, घृतकुमारी, शंकपुष्पी, गुलर आदि बहुत सी औषधीय फसलें हैं। इनकी देश के साथ-साथ विदेशों में भारी मांग है।

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इन औषधीय पौधों का उपयोग -

सफेद मुस्ली - प्रतिरोधक क्षमता
लेमनग्रास - तेल साबुन
श्यामा तुलसी - चाय, डियोड्रेंट, चमड़ा उद्योग
एलोवेरा - कॉस्मेटिक प्रॉडक्ट
अश्वगंधा - तनाव और चिंता की दवा
ब्राह्मी - कैंसर, अनीमिया, दमा, मूत्र वर्धक, रसौली, मिरगी की दवा
सतावर - दवा

पूरे देश में कुल 56,305 हेक्टेयर में खेती

नेशनल मेडिसिनल प्लांट के अनुसार उत्तर प्रदेश के बाद मध्यप्रदेश 12,251, केरल में 2269, कर्नाटक में 3926 और आंध्रा में 4350 हेक्टेयर जमीन पर औषधीय वनस्पतियों की खेती की जा रही है। पूरे देश में कुल 56,305 हेक्टेयर में औषधीय वनस्पति उगाई जा रही है।

राज्य आयुष सोसायटी भी शामिल

यूपी में औषधीय गुण वाले पौधों और जड़ी बूटी की खेती को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) और राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनबीआरआई) एक साथ काम कर रहे हैं। सीमैप भी एनएमपीबी के साथ मिलकर काम कर रहा है।

यूपी सरकार दे रही है प्रति हेक्टेयर अनुदान

बागवानी और फूड प्रोसेसिग विभाग की राष्ट्रीय औषधीय पौधा मिशन योजना 2009-10 में शुरू हुई थी। उत्तर प्रदेश में औषधीय पौधों की खेती को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योगी सरकार ने औषधीय खेती में लगे किसानों को लाभ प्रदान करने में राज्य आयुष सोसायटी को भी शामिल किया है। औषधीय खेती में किसानों की रुचि बढ़ाने के लिए सरकार किसानों को प्रति हेक्टेयर अनुदान भी दे रही है।

कम लागत, अधिक फायदा

औषधीय खेती करने से किसानों को कम लागत में अधिक फायदा होगा। उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की ओर से खेती की कुल लागत का 30 से 50 फीसद अनुदान देने की व्यवस्था है। 18 से 20 महीने की खेती में किसान प्रति हेक्टेयर 25 हजार से लेकर डेढ़ लाख तक की अतिरिक्त आमदनी कर सकते हैं।

जानकारी के लिए यहां करें सम्पर्क

योजना का लाभ लेने के लिए किसान जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय या जिला विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। आवेदन से पहले किसानों को upagriculture.com पर अपना पंजीयन करना होगा।