
Jewelers who shined with jewelery worth one and a half lakhs
Gold Hallmarking : अक्सर लोग अपने नजदीकी सुनार से ही सोने के जेवरात बनवाते हैं, जिसके एवज में पूरी रकम भी चुकाते हैं। अब से पहले आपको यह पता नहीं चल पाता था कि आप ने मोटी रकम खर्च करके जो साेने के जेवर खरीदे हैं, वे कितने शुद्ध हैं। लेकिन, अब सोने की शुद्धता मापना आपके बाएं हाथ का काम है। बस आपको इसके लिए हॉलमार्किंग वाले जेवर ही खरीदने होंगे। क्योंकि हॉलमार्क वाले सोने के जेवरों पर 6 डिजिट का एक नंबर लिखा होता है, जिससे सोने के जेवरों की शुद्धता (Purity Of Gold Jewelry) आसानी से मापी जा सकती है। इसलिए ध्यान रहे अब से हॉलमार्क वाले सोने के जेवर ही खरीदें। हालांकि परेशानी यह है कि अभी तक भी हजारों ज्वैलर्स ने हॉलमार्किंग का रजिस्ट्रेशन ही नहीं कराया है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की बात करें तो यहां 5 हजार ज्वैलर्स में से महज 297 ने ही हॉलमार्किंग का रजिस्ट्रेशन कराया है। इसलिए जब भी ज्वेलरी खरीदें तो दुकानदार रजिस्ट्रेशन की जानकारी जरूर कर लें।
दरअसल, देशभर में एक दिसंबर 2021 से हॉलमार्क वाले जेवर की बिक्री अनिवार्य कर दी गई है। इसके बावजूद अधिकतर ज्वैलर्स बिना हॉलमार्क वाले जेवर बेचना पसंद कर रहे हैं। गांव देहात के दुकानदार ग्राहकों से कह रहे हैं कि हॉलमार्किंग वाले जेवर महंगे होते हैं और ग्राहक भी दुकानदार की बातों में आकर फंस जाते हैं। लेकिन, सच तो यह है कि जब आप बिना हालमार्किंग वाले जेवर खरीदते हैं तो उसे बेचते समय आपको काफी नुकसान होता है। जबकि हॉलमार्क वाले आभूषण बेचने में आपको कोई नुकसान नहीं होता है।
बीआईएस से इस तरह मापे सोने की शुद्धता
बता दें कि सरकार ने हॉलमार्किंग वाले जेवर की शुद्धता परखने के लिए एक जनवरी 2022 को बीआईएस केयर ऐप लांच किया है। बीआईएस एप को आप प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं। इसके बाद ऐप पर आपको खरीदे गए हॉलमार्किंग सोने के आभूषण पर अंकित 6 डिजिट को डालना होगा। नंबर डालते ही आपके सामने आपके जेवर से संबंधित पूरी जानकारी मिल जाएगा। आपको पता चल जाएगा कि आपके खरीदे गए जेवर पर किस सेंटर में हॉलमार्किंग की गई है। ज्वेलरी का निर्माण कब किया गया। आपने किस ज्वेलर से खरीदा है और आभूषण कितने कैरेट का है।
जीएसटी भरते हैं, लेकिन हॉलमार्किंग रजिस्ट्रेशन नहीं करवा रहे
बीआईएस ऐप पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार अब तक देश भर में 1.24 करोड़ ज्वेलरी की ही हालमार्किंग हुई है। गोरखपुर में हॉलमार्किंग सेंटर संचालक महेश वर्मा ने बताया कि गोरखपुर में रोजाना 300 से 500 आभूषणों की हॉलमार्किंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि अब लोग जागरूक हो रहे हैं। आंकड़ों की मानें तो अकेले गोरखपुर में 5000 से अधिक ज्वैलर्स जीएसटी देते हैं, लेकिन हॉलमार्किंग का रजिस्ट्रेशन महज 297 ने ही कराया है।
Published on:
10 Jan 2022 03:25 pm
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